शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र जिसके बारे हमें लगता है कि वह एक सम्मानीय और आदरणीय काम है। हमारे धर्मशास्त्रों और बड़े बड़े विद्ववानों ने भी शिक्षा को सर्वोपरि बताया है। हजारों सालों से परम्परा कायम है कि बाकी सब छोड़ कर सबसे पहले शिक्षा और शिक्षकों का सम्मान किया जाए। गुरु को ब्रह्मा तक की संज्ञा दी गई है लेकिन अब शायद स्थिति ऐसी नही रही है। अब शिक्षा संस्थानों के संचालक साथ में पढ़ाने वाले अध्यापकों से अश्लील हरकतें, छेड़छाड़ और प्रताड़ित करने लगे है। जोकि बेहद निंदनीय कार्य है।

ताजा मामला मंडी के सुंदरनगर के सीआरसी संस्थान से निकल कर सामने आया है। जहां एक महिला की 2016 में प्रवक्ता के तौर पर नियुक्ति की गई। उसके बाद से आज तक सीआरसी सुंदरनगर में उस महिला प्रवक्ता को सिवाय अश्लील हरकतों और छेड़छाड़ के अलावा कोई भी मान- सम्मान नही मिला। महिला ने सीआरसी के एचओडी मनजीत सैनी और एओ संदीप त्रिवेदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है कि साक्षात्कार के समय महिला ने एचओडी मनजीत सैनी और उनके सहयोगी एओ संदीप त्रिवेदी को अपने शैक्षणिक दस्तावेजों के साथ जाति प्रमाण पत्र भी दिया था। जिसके चलते आरोपी महिला के अनुसूचित जाति से संबंधित होने के बारे भली भांति परिचित थे।

महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों आरोपी उससे जातीय आधार पर घृणा करते थे और डराते धमकाते रहते थे। उन्होंने पिछले चार साल में महिला को कई बार नौकरी से निकालने की भी बात कही है। एचओडी महिला को अपने आफिस में किसी ना किसी बहाने बुलाता था और उसके साथ अश्लील हरकतें करने की कोशिश करता था। जैसे बिना अनुमति हाथ पकड़ना, पीठ पर हाथ रखना आदि। इस प्रताड़ना से तंग आकर महिला ने बिना संस्थान में आए ईमेल के माध्यम से नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था।
महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी गुमनाम पत्रों और ईमेल के माध्यमों से उनकी झूठी शिकायतें करके परेशान भी करता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्य आरोपी मनजीत सैनी महिलाओं के लिए अश्लील शब्दों का प्रयोग करता था और शारीरिक बनावट के आधार पर उनका उपहास भी करता था। सीसीटीवी कैमरा में दिख रही महिलाओं को गंदी नियत से निहारता रहता है। इस बारे संस्थान की एक अन्य महिला अधिकारी ने भी मनजीत सैनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी जिस पर कभी कोई कार्यवाही ही नही हुई।

इस मामले में पुलिस की कार्यवाही भी पूरी तरह संदेह के घेरे में है। महिला का आरोप है कि पुलिस ने उसको केस दर्ज नही करवाने की सलाह दी। यही नही पुलिस ने महिला द्वारा एक महीना पहले भेजी गई शिकायत पर कोई कार्यवाही नही की गई। जब हमारी टीम ने इस बारे डीएसपी से बात की गई तो बहुत से सवालों पर जबाब देने से डीएसपी सुंदरनगर गुरुबचन सिंह ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला को जांच में सहयोग करने के लिए पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर आना ही होगा। एफआईआर में नाम नही होने के बारे कुछ भी कहने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी तब की जाएगी जब वह जांच में दोषी पाए जाएंगे।

हम आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदर्शों और केंद्र सरकार द्वारा पारित कानूनों के मुताबिक एससी एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने एससी एसटी एक्ट में नई धारा 1A का प्रावधान किया था। पुलिस द्वारा आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी नही करना, केंद्र सरकार के कानून की अवहेलना और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना मंडी पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है।

By RIGHT NEWS INDIA

RIGHT NEWS INDIA We are the fastest growing News Network in all over Himachal Pradesh and some other states. You can mail us your News, Articles and Write-up at: News@RightNewsIndia.com

error: Content is protected !!