Jobs Crisis: भारत में 69 प्रतिशत नौकरियां खतरे में, जानिए क्यों और कैसे

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Job crisis India: भारत में नौकरी के संकट को लेकर एक चौंका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 69 प्रतिशत नौकरियां खतरे में है जिसका सबसे कारण ऑटोमेशन है. ये स्थिति तब है जब देश अपने अपेक्षाकृत युवा कार्यबल के साथ अगले 20 वर्षों में 160 मिलियन नए श्रमिकों को जोड़ने के लिए तैयार है.

सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स फोरकास्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की मुख्य प्राथमिकता 2040 तक 1.1 बिलियन की कामकाजी आबादी तक पहुंचने के लिए कार्यबल में प्रवेश करने वाले नए श्रमिकों को समायोजित करने के लिए रोजगार सृजन करना होगा. विश्लेषक माइकल ओ’ग्राडी ने कहा कि भारत का कार्यबल युवा है, जिसकी औसत आयु 38 वर्ष है और इसकी कामकाजी आबादी अगले 20 वर्षों में 160 मिलियन तक बढ़ जाएगी. इसके अलावा भारत की श्रम शक्ति भागीदारी दर घटकर केवल 41 प्रतिशत रह गई है.

ऑटोमेशन के कारण खतरे में नौकरियां

रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं- भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और जापान में कामकाजी आबादी यूरोप और उत्तरी अमेरिका की तुलना में आटोमेशन के कारण अधिक जोखिम में है. 2040 तक आटोमेशन के कारण 63 मिलियन नौकरियों के जाने की उम्मीद है. 247 मिलियन से अधिक नौकरियों के उन उद्योगों में खतरे में पड़ने की उम्मीद है जो आटोमेशन के लिए अतिसंवेदनशील हैं, जैसे कि निर्माण और कृषि क्षेत्र में.

चीन और जापान में भी गहराया संकट

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2040 तक चीन अपनी कामकाजी आबादी में 11 प्रतिशत की गिरावट देखेगा और 7 प्रतिशत नौकरियां ऑटोमेशन के कारण समाप्त हो जाएंगी. 2020 और 2040 के बीच जापान की कामकाजी आबादी में 19 प्रतिशत की कमी आएगी. 2050 तक इसके लगभग एक तिहाई घटने का अनुमान है.

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