World News: भारत-कनाडा के बीच पिछले दो सालों से जारी तनाव के बीच रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस के प्रमुख ने बड़ा बयान दिया है। आरसीएमपी कमिश्नर माइक डुहेम ने स्पष्ट किया कि उनके पास मौजूदा जानकारी के अनुसार कनाडा में ऐसी कोई गतिविधियां नहीं चल रही हैं, जिनके तार भारत से जुड़े हों। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच संबंध सुधार के प्रयास तेज हुए हैं।
विदेशी दखल के सबूत नहीं, कई फाइलों की हुई जांच
सीटीवीन्यूज को दिए इंटरव्यू में डुहेम से पूछा गया कि क्या उनकी एजेंसी भारतीय एजेंटों की गतिविधियों को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, “हमारे पास जो फाइलें हैं, उनमें हमें किसी भी विदेशी संस्था से संबंध नहीं दिख रहा है।” उन्होंने साफ किया कि यह निष्कर्ष उनके पास मौजूद आपराधिक जानकारी और चल रही जांचों पर आधारित है। डुहेम ने बताया कि कुछ लोग दूसरों को डरा-धमका रहे हैं, लेकिन इन घटनाओं को किसी विदेशी संस्था से जोड़ने वाले सबूत नहीं हैं।
2024 के बयान पर क्या बोले डुहेम?
डुहेम नेअपने 2024 के पिछले बयान को भी स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि उस समय जो बयान दिया गया था, वह एक विशेष आपराधिक जांच पर आधारित था। उस फाइल में उन्होंने कहा था कि भारत सरकार के एजेंट या प्रॉक्सी शामिल थे। हालांकि, डुहेम ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय दमन के मामलों में किसी विशिष्ट विदेशी संस्था के साथ सीधे संबंध स्थापित करना अक्सर बेहद मुश्किल होता है।
कैसे शुरू हुआ भारत-कनाडा विवाद?
यह विवाद सितंबर 2023 मेंतब शुरू हुआ, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडाई सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। 2024 में आरसीएमपी ने कनाडा में तैनात कुछ भारतीय राजनयिकों पर गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के छह-छह राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।
कार्नी सरकार के साथ संबंध सुधार की कोशिशें
अब कनाडाके प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हैं, जिन्होंने सत्ता संभालते ही भारत के साथ संबंध सुधारने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री कार्नी और पीएम मोदी पिछले साल जून से अब तक तीन बार मिल चुके हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के यहां नए उच्चायुक्त भी नियुक्त किए हैं। हालांकि, कनाडा की खुफिया एजेंसी सीएसआईएस ने हाल ही में भारत को अभी भी विदेशी हस्तक्षेप के प्रमुख स्रोतों में शामिल किया है, जिससे तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।


