New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) निवेशकों के लिए समय से पहले निकासी (Early Redemption) की सुविधा सक्रिय कर दी है। सोने की वर्तमान कीमतों में रिकॉर्ड उछाल को देखते हुए, निवेशकों के लिए यह अपना मुनाफा बुक करने और पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करने का एक सुनहरा अवसर है।
यह सुविधा उन निवेशकों के लिए उपलब्ध है जिन्होंने अपने बॉन्ड को पांच साल तक होल्ड कर लिया है। रिडेम्पशन विंडो साल में दो बार, ब्याज भुगतान की तारीख से पहले खुलती है। प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए निवेशकों को ब्याज भुगतान की तारीख से कम से कम दस दिन पहले अपनी अर्जी देनी होगी।
रिडेम्पशन की प्रक्रिया और महत्वपूर्ण नियम
निवेशक अपने संबंधित बैंक, पोस्ट ऑफिस या नेट बैंकिंग पोर्टल के माध्यम से रिडेम्पशन का अनुरोध कर सकते हैं। डीमैट रूप में रखे गए बॉन्ड्स के लिए निवेशकों को अपने ब्रोकर से संपर्क करना होगा, जो ऑनलाइन माध्यमों से निकासी प्रक्रिया में सहायता प्रदान करेंगे। रिडेम्पशन की राशि सीधे निवेशक के पंजीकृत बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी।
कीमत का निर्धारण नेशनल बुलियन एसोसिएशन द्वारा पिछले तीन कार्य दिवसों के औसत मूल्य के आधार पर किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि निवेशक को बाजार की वर्तमान स्थिति के अनुरूप उचित मूल्य प्राप्त हो। चूंकि सोने के भाव वर्तमान में काफी ऊंचे हैं, इसलिए यह समय निवेश से बाहर निकलने के लिए रणनीतिक रूप से बेहतर है।
टैक्स के नजरिए से सबसे बेहतर विकल्प
निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि निकासी का तरीका उनके मुनाफे पर टैक्स को प्रभावित करता है। यदि आप आरबीआई की आधिकारिक विंडो के माध्यम से रिडेम्पशन करते हैं, तो व्यक्तिगत निवेशकों को इस लाभ पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। यह इसे सेकेंडरी मार्केट के मुकाबले अधिक आकर्षक और कर-कुशल विकल्प बनाता है।
इसके विपरीत, यदि कोई निवेशक सेकेंडरी मार्केट (शेयर बाजार) में अपने बॉन्ड बेचता है, तो उसे उस पर कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाना होगा। अतः, टैक्स बचाने और अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए आधिकारिक रिडेम्पशन विंडो का उपयोग करना सबसे समझदारी भरा निर्णय है। समय रहते अपना रिडेम्पशन कैलेंडर चेक करें और कागजी प्रक्रिया पूरी करें।
Author: Rajesh Kumar


