Hyderabad News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 10 मई, 2026 को हैदराबाद में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए देशवासियों से एक बड़ी और अभूतपूर्व अपील की। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, पीएम मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक साल तक सोने के आभूषण या किसी भी रूप में सोने की खरीद न करें। उन्होंने कहा कि यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) को बचाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के लिए आवश्यक है।
सोना न खरीदने की अपील के पीछे का गणित
प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि भारत दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण आयातकों में से एक है। हर साल शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के नाम पर अरबों डॉलर का सोना विदेशों से खरीदा जाता है। इस आयात का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव आता है। पीएम मोदी ने कहा कि यदि देशवासी एक साल के लिए अपनी इस आदत को सीमित कर दें, तो बचाई गई विदेशी मुद्रा का निवेश देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), शिक्षा और आधुनिक तकनीक के विकास में किया जा सकता है।
कॉपर: आने वाले समय का ‘नया सोना’
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने तांबे यानी कॉपर के रणनीतिक महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने इसे भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बताते हुए कहा कि जिस तरह इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर पैनल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, कॉपर की मांग तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कॉपर रिसाइक्लिंग और माइनिंग में निवेश बढ़ाएं। पीएम के अनुसार, कॉपर सेक्टर में आत्मनिर्भरता भारत के लिए सेमीकंडक्टर मिशन जितनी ही महत्वपूर्ण है।
आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति
प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल (Crude Oil) के आयात पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग और ग्रीन हाइड्रोजन ही भविष्य का रास्ता है। एथेनॉल के बढ़ते इस्तेमाल से न केवल विदेशी मुद्रा बच रही है, बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश का सुरक्षा कवच होता है, जो वैश्विक मंदी या अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के समय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत को अब केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता (Producer) बनना होगा। उन्होंने सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, चालू खाता घाटा (CAD) कम करने और रुपये को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों की भागीदारी और ‘स्वैच्छिक देशभक्ति’ की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने उद्योगपतियों और निवेशकों से ऐसे निर्णय लेने को कहा जो भारत को आयात पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया का प्रमुख एक्सपोर्ट हब बनाने में मदद करें।


