पेट्रोल-डीजल की कीमतों में फिर हो सकती है बढ़ोतरी! BPCL डायरेक्टर ने दी बड़ी चेतावनी

New Delhi: देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलने के आसार कम हैं। पिछले 10 दिनों में तीन बार कीमतों में इजाफे के बाद, अब और भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। वैश्विक स्तर पर जारी ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनावों के कारण रिटेल ईंधन की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है।

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के एचआर डायरेक्टर राज कुमार दुबे ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि मौजूदा वैश्विक हालात नहीं सुधरे, तो कीमतों में एक और बढ़ोतरी लगभग तय है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि यह वृद्धि कितनी होगी, लेकिन यह जरूर कहा कि यदि संकट लंबा खिंचता है, तो कीमतों को नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

सप्लाई में विविधता और भारत की रणनीति

राज कुमार दुबे ने इन चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत तैयारियों की सराहना की है। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के बावजूद, भारत ने अपनी कूटनीतिक रणनीति और सप्लाई स्रोतों में विविधता लाकर स्थिति को संभाला है। उन्होंने बताया कि पहले भारत के पास केवल 20 सप्लाई पॉइंट थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 40 हो गई है, जिसमें रूस भी शामिल है।

इस विविधता का ही परिणाम है कि युद्ध जैसे तनावपूर्ण माहौल में भी भारत में ईंधन की खपत बढ़ने के बावजूद कहीं भी कमी नहीं देखी गई है। सरकार ने सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाने के लिए आक्रामक कदम उठाए हैं, जिससे वैश्विक झटकों का असर देश पर कम से कम हो सके।

ग्रीन एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ता कदम

ऊर्जा संकट ने भारत के ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को भी नई गति दी है। दुबे ने बताया कि देश अब सोलर पावर, इथेनॉल ब्लेंडिंग और हाइड्रोजन जैसे टिकाऊ विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 200 GW से अधिक सोलर पावर इंस्टॉलेशन और नेचुरल गैस की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग की पहल ने न केवल पेट्रोल की निर्भरता कम की है, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार को भी बड़ी राहत दी है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए, हाइड्रोजन फ्यूल और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर काम करना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता बन गई है। यह बदलाव भविष्य में भारत को एक टिकाऊ और सुरक्षित ऊर्जा अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Author: Rajesh Kumar

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