रुपये में बड़ी गिरावट के आसार: डॉलर के मुकाबले 99 तक फिसल सकती है भारतीय मुद्रा, जानें क्या हैं बड़े कारण

New Delhi: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर अजय खंडेलवाल के अनुसार, रुपया जल्द ही 98 से 99 के स्तर को छू सकता है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय मुद्रा पर गहरा दबाव बना दिया है।

आंकड़ों के मुताबिक, साल की शुरुआत से अब तक रुपये में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। यह मौजूदा स्तर 2013 के ‘फ्रैजाइल फाइव’ दौर के बाद का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आयातित महंगाई में बढ़ोतरी होना तय है, जो आम जनता की जेब पर सीधा असर डालेगी।

विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी

एनएसडीएल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजारों से मोहभंग होता दिख रहा है। इस महीने अब तक 27,048 करोड़ रुपये की निकासी हो चुकी है। साल 2026 में अब तक FPIs कुल 2.2 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जो पिछले पूरे साल के 1.66 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को भी पार कर चुका है।

लगातार हो रही यह बिक्री रुपये की मजबूती को कमजोर कर रही है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक विदेशी निवेश का प्रवाह वापस नहीं लौटता, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा। हालांकि, नीति निर्माता इस स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।

आरबीआई की भूमिका और भविष्य की राह

रुपये की गिरावट को थामने के लिए आरबीआई के संभावित कदमों पर खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग अब बहुत आक्रामक तरीके से नहीं करेगा। इसके बजाय, आरबीआई ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प चुन सकता है, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के खतरों को देखते हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से सोने की खरीद को सीमित करने की अपील का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 के लिए चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी का लगभग 2.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे भुगतान संतुलन (BoP) पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

Author: Rajesh Kumar

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