हिमाचल सरकार के 12 उपक्रम घाटे में हैं। इनमें 11 निगम घाटे से जूझ रहे हैं, तो एक बोर्ड भी इसमें शामिल है। इस लेकर जयराम सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में जानकारी दी और माना कि पूर्व में फायदे में चल रहे निगम भी घाटे में आ गए, जोकि चिंता की बात है। इतना ही नहीं, सरकार ने तीन साल में घाटे में चल रहे सरकारी उपक्रमों के अध्यक्षों व उपाध्यक्षों पर करोड़ों रुपए की राशि खर्च की है, जिसमें पूर्व सरकार के भी दो साल का जिक्र किया गया है। घाटे में होने के बावजूद इन उपक्रमों में राजनीतिक तौर पर नियुक्तियों को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाए हैं और सरकार की घेराबंदी की है, मगर जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि यह रिवायत उनकी सरकार ने नहीं, बल्कि सालों से चल रही है और कांगे्रस ने ही यह रिवायत डाली है। इसके चलते आज राजनीतिक बाध्यता बन चुकी है कि ऐसी नियुक्तियां सरकार को करनी पड़ती हैं। सदन में इन उपक्रमों के घाटे को लेकर सवाल पूछा गया था, जिस पर सरकर की ओर से विस्तृत जानकारी दी गई।

इसमें मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी में जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि यह निगम या बोर्ड आज से घाटे में नहीं आए, बल्कि सालों पहले से है। सरकार को राजनीतिक रूप से नियुक्तियां भी करनी होती हैं। कांग्रेस ने पूर्व में छह अध्यक्ष लगाए थे, जबकि इनकी सरकार ने पांच ही लगाए हैं। इतना ही नहीं, कोविड काल में जब सभी का वेतन कटा, तो इन अध्यक्षों व उपाध्यक्षों का वेतन भी काटा गया है। उन्होंने माना कि फायदे में चलने वाले बोर्ड व निगमों का घाटे में आना चिंता की बात है, लेकिन सरकार अपने प्रयास कर रही है, ताकि इनको घाटे से उभारा जा सके। सदन में कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने यह सवाल उठाया था, जिनका कहना था कि यदि बीमारी है, तो उसका इलाज भी करवाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिन बोर्ड व निगमों में मंत्री खुद चेयरमैन हैं, वहां पर उपाध्यक्ष लगाने की जरूरत क्या है। ये नियुक्तियां पूरी तरह से फिजूलखर्ची है, जिसको रोका जाना चाहिए। सदन में बताया गया कि कौन-कौन से निगम व बोर्ड कितने घाटे में हैं। यह जानकारी क्योंकि पुराने पूछे गए सवाल की थी, लिहाजा इसमें 31 मार्च, 2020 तक का जिक्र किया गया है।

अरबों के घाटे में उपक्रम
बोर्ड / निगम                    घाटा
पर्यटन विकास निगम 50 करोड़ 32 लाख प्रदेश
ऊर्जा निगम     361 करोड़ 99 लाख
एससी/एसटी विकास।   26 करोड़ 23 लाख
अल्पसंख्यक वित्त-विकास 6 करोड़ 19 लाख
एचपीएमसी            85 करोड़ 09 लाख
राज्य वन विकास निगम    110 करोड़ 42 लाख
पथ परिवहन निगम   1533 करोड़ 70 लाख
वित्तीय निगम          153 करोड़ 48 लाख
एग्रो इंडस्ट्रीज          9 करोड़ 36 लाख
ऊर्जा संचार निगम    108 करोड़ 36 लाख
हस्तशिल्प एवं हथकरघा  13 करोड़ 43 लाख
राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड  1520 करोड़ 59 लाख

अध्यक्ष-उपाध्यक्षों पर लुटा दिए लाखों रुपए
31 मार्च, 2020 तक तीन साल में सरकार ने राजनीतिक तौर पर नियुक्त किए गए अध्यक्षों व उपाध्यक्षों पर खर्च की गई राशि का ब्यौरा देते हुए बताया है कि पर्यटन निगम में इस नियुक्ति पर 2,67,161.00 रुपए, वहीं ऊर्जा निगम में 5,45,669.99 रुपए, अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास निगम सोलन पर 13,33,365.00 रुपए का खर्च किया गया है। एचपीएमसी में 13,42,984.00 रुपए, वन विकास निगम पर 30,16,970.00 रुपए, परिवहन निगम में 56,75,777.00 रुपए तथा हस्तशिल्प हथकरघा निगम में राजनीतिक नियुक्ति पर 2017 के बाद से 28,57,990.00 रुपए की राशि खर्च की गई है।

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