अरब देश यमन के अदन एयरपोर्ट पर बुधवार को बड़ा धमाका हुआ। ब्लास्ट से तुरंत पहले देश की नई कैबिनेट के मंत्रियों को लेकर एक विमान लैंड हुआ था। विमान के उतरते ही उसके पास यह धमाका हुआ। इस दौरान फायरिंग की आवाज भी सुनी गई। हमले का शक हूथी विद्रोहियों पर है।

ब्लास्ट में 22 लोगों के मारे जाने की खबर हैं। हालांकि, आंकड़ा अभी बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में प्रधानमंत्री मीन अब्दुल मलिक सईद भी मौजूद थे। किसी मंत्री के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान में कितने मंत्री थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

सऊदी मीडिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री समेत सभी मंत्रियों को सुरक्षित प्रेसिडेंशियल पैलेस पहुंचा दिया गया। यमन के इनफॉर्मेशन मिनिस्टर मोमार अल इरयानी ने हमले के पीछे हूथी विद्रोहियों का हाथ होने का शक जताया है।

एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने एयरपोर्ट पर कई शव देखे हैं। अधिकारियों ने अपनी पहचान नहीं बताई, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं थी। घटना के बाद सोशल मीडिया पर शेयर की गई तस्वीरों में एयरपोर्ट की इमारत के पास मलबा और टूटे कांच दिखाई दे रहे हैं।

यमन काफी वक्त से गृहयुद्ध से जूझ रहा है। एक समझौते के तहत यहां के प्रधानमंत्री सईद के साथ सरकार के कई मंत्री अदन लौटे थे। यह समझौता पिछले हफ्ते ही प्रतिद्वंद्वी गुट के अलगाववादियों के साथ किया गया था। मलिक की सरकार का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता हासिल है। कई साल से चल रहे गृहयुद्ध के दौरान वह ज्यादातर वक्त निर्वासित रहे। यह सरकार सऊदी अरब की राजधानी रियाद से काम कर रही थी।

सऊदी अरब में रह रहे यमन के राष्ट्रपति अबेद रब्बो मंसूर हादी ने इस महीने की शुरुआत में मंत्रिमंडल में फेरबदल की घोषणा की थी। इसे अलगाववादियों के साथ चल रही लड़ाई को खत्म करने की दिशा में बड़े कदम के रूप में देखा गया था।

यमन की सऊदी अरब समर्थित सरकार ईरान के समर्थन वाले विद्रोहियों के साथ युद्ध कर रही है। उनका उत्तरी यमन के साथ-साथ देश की राजधानी सना पर भी नियंत्रण है। पिछले साल, विद्रोहियों ने अदन में एक मिलिट्री बेस में चल रही परेड में मिसाइल दागी थी। इसमें कई सैनिक मारे गए थे।

लगभग दो करोड़ आबादी वाले यमन की सीमा सऊदी अरब और ओमान से मिलती है। इसकी सीमा में 200 से ज्यादा द्वीप भी शामिल हैं। यह देश 2015 से गृहयुद्ध की मार झेल रहा है। यह युद्ध देश के पूर्व और अभी के राष्ट्रपति के वफादार गुटों के बीच चल रहा है। राजधानी सना में हूथी विद्रोही मौजूद हैं। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह का समर्थक माना जाता हैं। अदन में मंसूर हादी की सरकार है। इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल है। हालांकि, सरकार का असर अदन के कुछ इलाकों तक ही है।

अल कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक भी देश में कब्जे की लिए हमले करते रहते हैं। इस वजह से यह देश बर्बादी की कगार पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, मार्च 2015 से जनवरी 2017 तक ही यहां 10 हजार नागरिकों सहित कुल 16 हजार 200 लोग मारे जा चुके थे।

By RIGHT NEWS INDIA

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