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BMC चुनाव नतीजे: AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में जड़ें जमाईं, 4 सीटों पर कब्जा, समाजवादी पार्टी को लगा झटका

Mumbai News: बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने अच्छी सफलता पाई है। पार्टी ने मुस्लिम बहुल चार वार्डों पर जीत दर्ज की है। इस जीत ने समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका दिया है। मतगणना अभी भी जारी है लेकिन एआईएमआईएम की बढ़त स्पष्ट नजर आ रही है।

पार्टी ने वार्ड 134, 143, 145 और 135 पर शानदार जीत हासिल की है। इन वार्डों में एआईएमआईएम के उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इस सफलता ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में पार्टी की उपस्थिति को मजबूत किया है।

मेहजबीन खान ने खोला पार्टी का खाता

वार्ड नंबर 134 सेएआईएमआईएम उम्मीदवार मेहजबीन अतीक अहमद खान ने जीत हासिल की। यह जीत पार्टी के लिए पहली और अहम सफलता थी। गोवंडी-मानखुर्द जैसे इलाकों में पार्टी का पहले से ही मजबूत आधार है। जीत के बाद समर्थकों ने उनका उत्साहपूर्ण स्वागत किया।

मेहजबीन खान की जीत ने पार्टी के अन्य उम्मीदवारों के लिए रास्ता साफ किया। इसके बाद अन्य वार्डों से भी अच्छे नतीजे आने लगे। स्थानीय निकाय चुनावों में यह पार्टी की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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खैरनिसा अकबर हुसैन ने दर्ज की प्रचंड जीत

वार्ड 145 सेएआईएमआईएम उम्मीदवार खैरनिसा अकबर हुसैन विजयी रहीं। उन्होंने 7653 वोट प्राप्त किए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार दीपक फालोद को 2095 वोटों के अंतर से हराया। खैरनिसा ने विकास कार्यों पर ध्यान देने का संकल्प लिया।

खैरनिसा अकबर हुसैन एआईएमआईएम नेता अकबर हुसैन की पत्नी हैं। उनकी यह जीत पार्टी के पारिवारिक नेतृत्व को भी दर्शाती है। मुंबई में पार्टी का यह प्रदर्शन उसकी बढ़ती स्वीकार्यता को दिखाता है।

अन्य वार्डों में भी रही सफलता

वार्ड 143 सेमोहम्मद फरसाना ने जीत हासिल की। वार्ड 135 से इरशाद खान विजयी रहे। इन सभी जीतों ने समाजवादी पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। समाजवादी पार्टी का इन इलाकों में पारंपरिक वोट बैंक माना जाता था।

एआईएमआईएम की इस सफलता ने मुंबई की स्थानीय राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। यह पार्टी धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। भविष्य में पार्टी और अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

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राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकोंका मानना है कि यह जीत एआईएमआईएम की रणनीतिक सफलता है। पार्टी ने विशिष्ट क्षेत्रों में अपना ध्यान केंद्रित किया। स्थानीय मुद्दों और विकास के एजेंडे ने मतदाताओं को आकर्षित किया। इससे पार्टी को फायदा हुआ।

समाजवादी पार्टी को इस हार से सबक लेना चाहिए। पार्टी को अपनी जमीनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अब एआईएमआईएम एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी है। इससे भविष्य के चुनावी समीकरण प्रभावित होंगे।

बीएमसी में नया राजनीतिक समीकरण

एआईएमआईएम कीयह सफलता बीएमसी में नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है। चार सीटें पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हैं। ये सीटें पार्टी को स्थानीय निकाय में अपनी आवाज उठाने का मौका देंगी। पार्टी विकास के मुद्दों पर अपना एजेंडा रख सकेगी।

अन्य दलों को अब एआईएमआईएम को गंभीरता से लेना होगा। मुंबई की बहुलवादी राजनीति में यह पार्टी एक सक्रिय खिलाड़ी बनकर उभरी है। भविष्य में पार्टी की भूमिका और बढ़ सकती है। यह बदलाव महानगर की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है।

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