Mumbai News: मुंबई में एक बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है। देश की सबसे अमीर महानगरपालिका (BMC) के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इतिहास रच दिया है। बीएमसी के 227 वार्डों के नतीजों ने करीब तीन दशक से चले आ रहे ठाकरे परिवार के वर्चस्व को खत्म कर दिया है। महायुति गठबंधन (बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। मुंबई की जनता ने इस बार ‘विकास’ को चुनते हुए सत्ता की चाबी महायुति को सौंप दी है। बीजेपी अब बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
बीएमसी में अब ‘महायुति’ का राज
बीएमसी चुनाव के नतीजों ने सबको चौंका दिया है। बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना (महायुति) ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की है। यह बहुमत के जादुई आंकड़े 114 से ज्यादा है।
- बीजेपी: 89 वार्ड (सबसे बड़ी पार्टी)
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 29 वार्ड
- शिवसेना (उद्धव गुट): 65 वार्ड
- कांग्रेस: 24 वार्ड
- एमएनएस: 6 वार्ड
इन नतीजों के बाद अब मेयर और स्थायी समिति पर महायुति का पूरा नियंत्रण होगा। 74,000 करोड़ रुपये के बजट वाली इस नगरपालिका में अब ठाकरे परिवार की पकड़ कमजोर हो गई है।
उद्धव और राज ठाकरे का जादू नहीं चला
इस चुनाव में ठाकरे चचेरे भाई (उद्धव और राज) 20 साल बाद एक साथ आए थे। उन्होंने मतदाताओं को ‘मराठी अस्मिता’ और ‘ठाकरे ब्रांड’ के नाम पर रिझाने की कोशिश की। लेकिन, जनता ने इसे नकार दिया। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) 65 सीटों के साथ विपक्ष में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर रह गई है। वहीं, राज ठाकरे की एमएनएस महज 6 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 24 और एआईएमआईएम को 8 सीटें मिली हैं।
जनता ने 25 साल की सत्ता को नकारा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस जीत को ‘विकास’ की जीत बताया है। उन्होंने ठाकरे भाइयों पर निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई ने भावनाओं के बजाय विकास को चुना है। शिंदे ने कहा, “जनता ने उन लोगों के खिलाफ वोट दिया है, जो 25 साल से सत्ता में थे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों को अब काम चाहिए, सिर्फ बातें नहीं।
बीजेपी ने बताया पीएम मोदी की जीत
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया है। उन्होंने कहा कि मुंबईवासियों ने महायुति की नीतियों पर भरोसा जताया है। अब शहर को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। उधर, उद्धव गुट का कहना है कि उन्होंने कड़ी टक्कर दी, लेकिन वे बहुमत से चूक गए। अब सभी की नजरें नए मेयर के चुनाव पर टिकी हैं।
