Mumbai News: मुंबई के भविष्य का फैसला आज होने वाला है। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव के लिए आज सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी। इससे पहले आए आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को हुए मतदान में 52.94 फीसदी वोटिंग हुई है। एग्जिट पोल के नतीजे भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट की बड़ी जीत की ओर इशारा कर रहे हैं। वहीं, उद्धव और राज ठाकरे का गठबंधन पिछड़ता नजर आ रहा है। करीब चार साल बाद मुंबई को अब अपना नया मेयर मिलने जा रहा है।
एग्जिट पोल में महायुति की बंपर जीत
एक्सिस माई इंडिया के एग्जिट पोल ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन को बड़ी बढ़त दिखाई है। अनुमान के मुताबिक, महायुति को 227 में से 131-151 सीटें मिल सकती हैं। बीएमसी में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत है। दूसरी तरफ, शिवसेना (यूबीटी), मनसे (MNS) और एनसीपी (SP) के गठबंधन को 58-68 सीटें मिलने की संभावना है। जनमत पोल ने भी भाजपा गठबंधन को 138 सीटें दी हैं। कांग्रेस गठबंधन को 12-16 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है।
8 साल बाद हुआ चुनाव, वार्ड 114 में सबसे ज्यादा वोटिंग
मुंबई में यह चुनाव आठ साल के लंबे अंतराल के बाद हुआ है। पिछले चुनाव 2017 में हुए थे। पिछला कार्यकाल मार्च 2022 में खत्म हो गया था। राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, वार्ड 114 में सबसे ज्यादा 65.53 फीसदी मतदान हुआ। वहीं, वार्ड 227 में सबसे कम 20.88 फीसदी वोट पड़े। कुल 1 करोड़ 3 लाख मतदाताओं में से करीब 54.76 लाख लोगों ने वोट डाला। महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत (52.8%) पुरुषों (52.2%) से थोड़ा बेहतर रहा।
ठाकरे बंधुओं का ‘मराठी कार्ड’ बनाम भाजपा का विकास
इस चुनाव में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए थे। उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने गठबंधन कर ‘मराठी अस्मिता’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। वहीं, भाजपा ने सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। उन्होंने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विकास योजनाओं को मुद्दा बनाया। भाजपा का चुनावी तंत्र और प्रचार अभियान काफी मजबूत दिखा। अब देखना होगा कि जनता ने किस पर भरोसा जताया है।
आज 23 केंद्रों पर होगी गिनती
बीएमसी चुनाव की मतगणना आज मुंबई के 23 केंद्रों पर होगी। सुबह 10 बजे से रुझान आने शुरू हो जाएंगे। इस चुनाव में करीब 1,700 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर लगी है। साल 2017 में अविभाजित शिवसेना ने 84 और भाजपा ने 82 सीटें जीती थीं। हालांकि, 2022 में शिवसेना में हुई टूट के बाद यह पहला बड़ा निकाय चुनाव है। नतीजे बताएंगे कि असली शिवसेना किसे माना गया है।
