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JNU कैंपस में खूनी संघर्ष: नकाबपोशों ने लोहे की रॉड से छात्रों को पीटा, मॉब लिंचिंग का आरोप

Delhi News: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार देर रात छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प से हड़कंप मच गया। आरोप है कि हथियारों और लोहे की रॉड से लैस प्रदर्शनकारियों ने छात्रों पर जानलेवा हमला किया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का दावा है कि वामपंथी विचारधारा से जुड़े करीब 300 से 400 नकाबपोशों ने स्टडी रूम में घुसकर छात्रों को निशाना बनाया। इस संघर्ष में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है।

एबीवीपी ने लगाया मॉब लिंचिंग का गंभीर आरोप

एबीवीपी के पदाधिकारियों ने इस घटना को एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। जेएनयूएसयू (JNUSU) जॉइंट सेक्रेटरी वैभव मीणा ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से कैंपस में लेफ्ट विंग की हड़ताल चल रही थी। रविवार रात को भीड़ ने अचानक आतंक मचाना शुरू कर दिया। वैभव के अनुसार, नकाबपोश लोगों ने स्कूलों और स्टडी रूम में घुसकर छात्रों को डराकर भगा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजय नाम के छात्र को 150 लोगों की भीड़ ने घेरकर मॉब लिंच करने की कोशिश की।

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर सवाल

घटना के बाद कैंपस की सुरक्षा और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। एबीवीपी के मीडिया कन्वीनर विजय जायसवाल ने कहा कि जब हमला हो रहा था, तब जेएनयू सिक्योरिटी गार्ड और दिल्ली पुलिस के जवान वहां मौजूद थे। आरोप है कि इसके बावजूद उन्होंने हिंसा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विजय ने बताया कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे और उन्होंने चुन-चुनकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं और सामान्य छात्रों को निशाना बनाया।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

यूनिवर्सिटी कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है। छात्र संगठनों ने जेएनयू प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। एबीवीपी ने प्रशासन से अपील की है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर नकाबपोश हमलावरों की पहचान की जाए। साथ ही, हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और कैंपस में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

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