Tehran News: ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गया है। तेहरान के बाहरी इलाकों में इजराइली ड्रोन हमलों ने तेल डिपो और रिफाइनरियों को तबाह कर दिया है। इन धमाकों से निकले जहरीले धुएं ने आसमान को काला कर दिया, जिसके बाद शहर में ‘काली बारिश’ दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध से पैदा हुआ प्रदूषण आने वाले कई दशकों तक लोगों की सेहत और प्रकृति को नुकसान पहुंचाता रहेगा।
तेल डिपो पर हमलों से उठा जहरीला गुबार
तेहरान में 8 मार्च को डरावने दृश्य देखे गए जब आसमान से काली बारिश होने लगी। इजराइली हमलों के कारण तेल रिफाइनरियों में भीषण आग लग गई थी। धुएं के गुबार बादलों के साथ मिलकर बरसने लगे। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड के प्रोफेसर नेजात रहमानियन के अनुसार, यह घटना 35 साल पहले हुए गल्फ वॉर की याद दिलाती है। उस समय कुवैत के तेल कुओं की आग का धुआं 1,290 किलोमीटर दूर हिमालय तक पहुंच गया था, जिससे ग्लेशियर पिघलने लगे थे।
सेहत पर मंडरा रहा है गंभीर खतरा
यह प्रदूषण इंसानी शरीर के लिए बेहद घातक है। मिसाइलों और बमों के विस्फोट से भारी धातुएं और जहरीले रसायन हवा, पानी और मिट्टी में मिल जाते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह अम्लीय बारिश त्वचा को झुलसा सकती है। इससे फेफड़ों की गंभीर बीमारियां होने का डर है। खास तौर पर छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर इसका सबसे बुरा असर पड़ सकता है। ईरानी प्रशासन ने पहले लोगों को घरों में रहने की सलाह दी थी।
तेहरान की भौगोलिक स्थिति ने बढ़ाई मुश्किल
तेहरान के लिए यह संकट और भी बड़ा है क्योंकि यह शहर अल्बोर्ज पर्वत श्रृंखला के नीचे बसा है। पहाड़ों की वजह से हवा का बहाव रुक जाता है और प्रदूषण लंबे समय तक शहर के ऊपर ही फंसा रहता है। यहाँ की हवा में पहले से ही सीसा, कैडमियम और निकेल जैसी खतरनाक धातुएं मौजूद हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि युद्ध थमने के बाद भी इस प्रदूषण को साफ करना एक बहुत बड़ी और महंगी चुनौती होगी।

