हिमाचल: “लो प्रोफाइल” मुख्यमंत्री पर बड़ा दांव लगाएगी भाजपा, नजरें 2022 के चुनावों पर

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पांच बार विधायक रहे जय राम ठाकुर के रिज्यूम पर जो सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी, वो थी उनकी ‘लो प्रोफाइल’- एक कमजोर गुणवत्ता जिसने उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक चरित्र को विशेष आकार दिया। वह वो हैं। और आज भी। यह तब सामने आया जब उन्हें 2017 में सबसे ज्यादा जरूरत थी, भाजपा नेतृत्व ने पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में शानदार जीत दर्ज करने के बाद पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री चुनने के लिए मंथन कर रही थी।

जयराम ठाकुर जैसे अपरिवर्तनशील नेतृत्व को मौका दिया गया, वो कम महत्वपूर्ण था। वो बड़ी आबादी को साबित करने वाले नेता नहीं थे। सत्ता में उनका अनुभव 2009-12 में प्रेम कुमार धूमल के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में एक संक्षिप्त कार्यकाल था।

मंडी क्षेत्र से एक व्यक्ति को चुनकर, भविष्य के लिए युवा नेताओं की फसल को तैयार करना भाजपा की सोची-समझी योजना का केंद्र था; शांता कुमार और हिमाचल में दो बार सीएम रहे धूमल जैसे दिग्गज नेताओं को किनारे कर 56 साल की उम्र में मुख्यमंत्री ठाकुर हिमाचल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके मंत्रिमंडल में भी इसी उम्र के तकरीबन सभी चेहरे हैं। तीन वरिष्ठों के अलावा, सभी उनके आरएसएस-एबीवीपी-बीजेवाईएम से और कुछ उनके साथी हैं।

राज्य के मुख्यमंत्री पद के रूप में कार्यभार संभालने के बाद सीएम जयराम ठाकुर के रिज्यूम में ज्यादा कुछ बदला नहीं है। उनका अब तक का कार्यकाल उतना दिलचस्प नहीं रहा है जो उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने बिना सोचे-समझे काम किया है। उनके आलोचकों ने नौकरशाही पर उनकी कमजोर पकड़ और अपने मंत्रियों पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर शिकायत भी की। उनपर परियोजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण समय को बर्बाद करना और महामारी के दौरान ठीक तरीके से परिस्थितियों को ना संभालने के आरोप हैं। राज्य में साल 2022 के अंत विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री को लेकर ये अच्छे संकेत हैं, ऐसा भाजपा नहीं सोचती है।

पार्टी के भीतर और बाहर, उनके विरोधियों द्वारा सीएम जयराम ठाकुर की प्रशंसा की जाती है क्योंकि उन्होंने कभी भी प्रतिशोध जैसी या महत्वाकांक्षी होने के संकेत नहीं दिखाए हैं। उनके नेतृत्व करने का एक महत्वपूर्ण बिंदु राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ विजिलेंस मामलों को खत्म करना है। भाजपा की अगुवाई वाली प्रेम कुमार धूमल और कांग्रेस के वीरभद्र सिंह सरकार ने राजनीतिक प्रतिशोध में समय और संसाधन- दोनों बर्बाद किए। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह का जुलाई में निधन हो गया है। अक्सर वो ठाकुर को सार्वजनिक तौर पर उनकी प्रशंसा करते थे। भाजपा शासित राज्य उत्तराखंड से इतर सीएम ठाकुर को अपने नेतृत्व को लेकर कोई असंतोष या खतरा नहीं रहा, जहां इस साल तीन बार मुख्यमंत्री बदले जा चुके हैं। उनका कार्यकाल विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त रहा है। उनकी स्थिरता इस तथ्य से भी निकलती है कि उन्होंने हमेशा जनता और पार्टी के शीर्ष लोगों तक खुद की पहुंच को सरल बनाया है।

विधानसभा चुनाव में अभी एक वर्ष से अधिक का समय बचा है। सीएम ठाकुर के पास कोविड खामियों से उबरने और अपने विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों को लागू करने का समय है, जिसमें से कुछ को सीएम ठाकुर ने महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। वो निस्संदेह, आत्मविश्वासी है। उन्होंने हाल ही में कहा था, “मैं 2022 में उसी जगह पर रहूंगा जहां आप मुझे आज ढूंढते हैं।” उनके आत्मविश्वास को नहीं डगमगाया जा सकता है। कांग्रेस भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी है जिसे 2017 के चुनावों में हारने के बाद 2019 की सभी चार लोकसभा सीटों और दो राज्य विधानसभा उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। अब कांग्रेस राज्य के सबसे बड़े नेता वीरभद्र सिंह को खो चुकी है। यदि भाजपा आगामी चार उपचुनावों- तीन विधानसभा सीटों और मंडी लोकसभा सीट, जो दिवंगत वीरभद्र सिंह के पास थी- यदि इस पर जीत दर्ज करने में कामयाब होती है, तो मुख्यमंत्री ठाकुर पार्टी के भविष्य के लिए नेता के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत रख सकते हैं। मंडी-मुख्यमंत्री के गृह जिला है जो उनकी कामयाबी या नाकामी में शामिल किया जाएगा।

भाजपा एक राजमिस्त्री के बेटे ठाकुर पर ईंट से ईंट, पत्थर के बदले पत्थर बनाने के लिए एक मजबूत समर्थन के आधार पर भरोसा कर रही है, जो राज्य में सत्ता विरोधी लहर के माध्यम से देखेगा, जिसने पांच साल बाद कभी भी एक ही पार्टी को सत्ता आने का मौका नहीं दिया है। और सीएम ठाकुर राज्य भाजपा अध्यक्ष के रूप में अपने अनुभव पर भरोसा कर सकते हैं, जब उनकी निगरानी में पार्टी ने 2009 के विधानसभा चुनावों में 68 में से 41 सीटों पर जीत हासिल की थी, जिससे धूमल के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए रास्ता बना था। अब 2022 को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का नारा मिशन दोहराव है। नड्डा सरकार, मंत्रियों और विधायकों पर नजर रख रहे हैं और संभवत: उपचुनावों से पहले राज्य का दौरा करेंगे-जो पार्टी के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि मुख्यमंत्री के लिए।

उपचुनावों को ठाकुर के लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि उनके राज्य में भाजपा के चुने हुए व्यक्ति के रूप में बने रहने का रास्ता साफ दिख रहा है। या ऐसा लगता है कि एक और नेता है जो युवा नेताओं को सत्ता संभालने के लिए भाजपा भरोसा रखती है। वो हैं पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे और नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, जिन्हें पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रालय के फेरबदल में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। अपने समर्थन की वजह से धूमल की 2022 में एक प्रमुख भूमिका होने की संभावना है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि धूमल 2017 की अपनी हार का बदला लेने के लिए अपना बहुत कुछ सिक्का चल सकते हैं। ऐसे में आलाकमान के ऐलान का बेसब्री से इंतजार रहेगा।

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