कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि सिर्फ उनकी पार्टी नहीं बल्कि बीएसपी, एसपी और एनसीपी जैसी पार्टियां भी भारतीय जनता पार्टी से मुकाबला नहीं कर पा रही हैं। राहुल गांधी ने इसकी वजहों का जिक्र करते हुए कहा है कि बीजेपी ने देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जा कर लिया है, साथ ही उसके पास वित्तीय और मीडिया प्रभुत्व है। हार्वर्ड केनेडी स्कूल के एक ऑनलाइन कार्यक्रम में शिरकत करते हुए राहुल गांधी ने असम में बीजेपी नेता की कार में ईवीएम मिलने की घटना का भी जिक्र किया है।  

राहुल गांधी ने कहा, ”इस देश के संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया गया है। बीजेपी के पास पूर्ण वित्तीय और मीडिया प्रभुत्व है। केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि बीएसपी, एसपी, एनसीपी भी चुनाव नहीं जी रही हैं।” राहुल ने आगे कहा, ”चुनाव जीतने के लिए मुझे संस्थागत ढांचे की जरूरत है, मुझे ऐसे न्यायिक व्यवस्था की जरूरत है जो मेरी रक्षा करे, मुझे स्वतंत्र मीडिया की आवश्यकता है, मुझे वित्तीय समता की आवश्यकता है, मुझे संरचनाओं का समहू चाहिए, जो मुझे एक राजनीतिक पार्टी चलाने की अनुमति दे। मेरे पास ये चीजें नहीं हैं।”

लाइव सेशन में राजदूत निकोलस बर्न्स के साथ बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने असम में ईवीएम पर हुए विवाद का भी जिक्र किया और कहा, ”हमारे लिए जो कैंपेन चलाते हैं, वे वीडियो भेज रहे हैं, जिसमें बीजेपी प्रत्याशी की कार में वोटिंग मशीनें हैं। लेकिन नेशनल मीडिया में कुछ नहीं जा रहा है।”

संस्थाएं हमारी रक्षा नहीं कर पा रही हैं
कांग्रेस की चुनावी असफलता और आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर राहुल गांधी ने कहा, “हम आज ऐसी अलग स्थिति में हैं जहां वो संस्थाएं हमारी रक्षा नहीं कर पा रही हैं जिन्हें हमारी रक्षा करनी है। जिन संस्थाओं को निष्पक्ष राजनीतिक मुकाबले के लिए सहयोग देना है वो अब ऐसा नहीं कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष की तरफ से संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह कब्जा कर लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि सत्तापक्ष से लोगों का मोहभंग हो रहा है और यह कांग्रेस के लिए एक अवसर भी है।

नौकरियों के सृजन पर जोर देंगे
यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलने पर उनकी आर्थिक नीति क्या होगी तो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि वह नौकरियों के सृजन पर जोर देंगे। अर्थव्यवस्था को गति देने के उपाय से जुड़े सवाल पर कांग्रेस नेता ने कहा, ”अब सिर्फ एक ही विकल्प है कि लोगों के हाथों में पैसे दिए जाएं। इसके लिए हमारे पास ‘न्याय का विचार है। उन्होंने चीन के बढ़ते वर्चस्व की चुनौती के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देश लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ही समृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र के विकास से बीजिंग की चुनौती से निपट सकते हैं।

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