ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के पिता ने फ्रांस की नागरिकता के लिए आवेदन किया है। ब्रेक्जिट डील के फाइनल होने के तुरंत बाद पीएम जॉनसन के पिता का यह कदम ब्रिटेन के फैसले का विरोध माना जा रहा है। बता दें कि बुधवार को ही ब्रिटिश संसद ने यूरोपीय यूनियन के साथ ब्रेक्जिट ट्रेड डील को अपनी मंजूरी दी थी। जिसके बाद पीएम बोरिस जॉनसन और क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ने भी इस पर हस्ताक्षर किए।
बोरिस जॉनसन के पिता स्टैनले जॉनसन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अपनी फ्रांसीसी पहचान फिर हासिल करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि यह फ्रांसीसी नागरिक बनने का सवाल नहीं है। यदि मैं ठीक से समझता हूं तो मैं फ्रेंच हूं। मेरी मां का जन्म फ्रांस में हुआ था। उनकी मां पूरी तरह फ्रेंच थीं जिनके दादा भी फ्रेंच थे। मेरे लिए यह सवाल अब तक वह चीज फिर से हासिल करने का है जो मैं हूं। स्टैनले जॉनसन ने कहा कि मैं हमेशा यूरोपीय रहूंगा। यह निश्चित है। आप मुझे ब्रितानी नहीं कह सकते।

यूरोपीय संसद के सदस्य रह चुके हैं पीएम जॉनसन के पिता
बोरिस जॉनसन के पिता 80 साल के हैं और वह पूर्व में यूरोपीय संसद के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने 2016 के जनमत संग्रह में ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के साथ रहने का समर्थन किया था। बृहस्पतिवार को अंतरराष्ट्रीय समयानुसार रात 11 बजे ब्रिटेन का यूरोपीय संघ से आर्थिक नाता टूट जाने के बाद ब्रिटेन के नागरिक यूरोपीय संघ के तहत आने वाले 27 देशों में रहने और काम करने का स्वत: प्राप्त अधिकार खो देंगे। लेकिन, जिनके पास दोहरी नागरिकता है, उन्हें यह अधिकार मिला रहेगा।

क्या है ब्रेक्जिट
ब्रेक्जिट यानी ब्रिटेन+एक्जिट। ब्रेक्जिट का सीधा सा मतलब है ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से बाहर जाना। ब्रिटेन ने साल भर पहले ही यूरोपीय यूनियन से बाहर जाने का ऐलान कर दिया था। 2016 में ब्रिटेन में यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने के लिए जनमत संग्रह हुआ था। जिसमें वहां के लोगों ने बड़ी संख्या में ब्रेक्जिट को समर्थन दिया था। इस कारण तत्कालीन डेविड कैमरन सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे के कार्यकाल में भी कई बार ब्रेक्जिट ट्रेड डील को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन समझौता नहीं हो सका था। जिसके बाद बोरिस जॉनसन के कार्यकाल में आखिरकार यूरोपीय यूनियन के साथ सहमति बन गई है।

द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के युद्ध में भाग लेने वाले सभी देशों को नुकसान झेलने पड़े थे। इस युद्ध के खत्म होने के पांच साल बाद फ्रांस और जर्मनी ने एक संधि की थी, जिसमें कहा गया था कि दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ अब कोई युद्ध नहीं करेंगे। इस योजना के तहत छह देशों ने साल 1950 में एक डील पर हस्ताक्षर किए। सात साल बाद रोम में एक संधि हुई। जिसके बाद यूरोपीय आर्थिक समुदाय (ईसीसी) का गठन किया गया। इसी यूरोपीय आर्थिक समुदाय को आज यूरोपीय यूनियन के रूप में जाना जाता है। साल 1973 की शुरुआत में तीन नए देश इससे जुड़े। इनमें से एक देश ब्रिटेन था। वर्तमान में ईयू में 27 सदस्य हैं और इनकी कुल आबादी करीब 50 करोड़ है।

By RIGHT NEWS INDIA

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