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बिहार शिक्षा विभाग: एक शिक्षिका के नाम पर 15 साल तक चला फर्जीवाड़ा, बैंक ने खोली पोल

Bihar News: बिहार के शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। झारखंड की एक शिक्षिका के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सिवान की एक महिला ने पंद्रह वर्षों तक बाढ़ में शिक्षिका की नौकरी की। यह मामला तब खुला जब असली शिक्षिका को बैंक से पता चला कि उसके पैन नंबर पर पहले से ही लोन लिया जा चुका है।

झारखंड के बोकारो जिले की मनोरमा देवी वर्ष 2005 से शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने हाल ही में एक बैंक से ऋण के लिए आवेदन दिया। बैंक ने बताया कि उनके पैन नंबर पर बिहार के बाढ़ जिले से सात लाख रुपये का ऋण पहले ही लिया जा चुका है। इस पर मनोरमा ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस जांच में पता चला कि बाढ़ स्थित कमला कन्या मध्य विद्यालय में मनोरमा देवी के नाम से एक महिला पिछले पंद्रह साल से शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी। यह महिला सिवान जिले की निवासी निकली। उसने असली मनोरमा के सभी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए वर्ष 2010 में नियुक्ति प्राप्त की थी।

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नकली शिक्षिका हुई फरार

जांच शुरू होने के बाद नकली शिक्षिका फरार हो गई। पुलिस के अनुसार वह तीज के त्योहार का बहाना बनाकर अपने मायके सिवान चली गई। पुलिस की टीम उसे ढूंढने में जुटी हुई है। विद्यालय के अन्य शिक्षकों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी सहकर्मी नकली पहचान के साथ कार्यरत थी।

बैंक ने उजागर किया मामला

यह मामला एक बैंक की सामान्य जांच के दौरान उजागर हुआ। बैंक ने ऋण आवेदन प्रक्रिया के दौरान पैन नंबर की जांच की थी। जब पता चला कि उस पैन पर पहले से ऋण लिया जा चुका है तो बैंक ने असली मनोरमा को इसकी सूचना दी। इस तरह पंद्रह साल से चल रहा यह फर्जीवाड़ा सामने आया।

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शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

बाढ़ प्रखंड के शिक्षा पदाधिकारी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान यह धोखाधड़ी कैसे संभव हो पाई। दस्तावेज सत्यापन में किस प्रकार की चूक हुई।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

असली मनोरमा देवी ने बोकारो में एक आपराधिक मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और व्यक्तिगत दस्तावेजों का गलत उपयोग किया गया। पुलिस दोनों राज्यों में समन्वय के साथ इस मामले की जांच कर रही है। इस मामले ने शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर कमियों को उजागर किया है।

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