Bangladesh News: बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश की नई संसद का पहला सत्र 12 मार्च को आयोजित करने का निर्णय लिया है। राष्ट्रपति ने यह कदम बांग्लादेशी संविधान के अनुच्छेद 72(1) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए उठाया है। यह सत्र सुबह 11 बजे से शुरू होगा। हालांकि, पूर्व स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति ने एक बड़ा संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है, जिससे सत्र की अध्यक्षता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।
क्या कहता है बांग्लादेश का संविधान?
बांग्लादेश के संवैधानिक नियमों के मुताबिक, चुनाव परिणामों की राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) जारी होने के 30 दिनों के भीतर संसद का उद्घाटन सत्र बुलाना अनिवार्य है। राष्ट्रपति यह सत्र प्रधानमंत्री की लिखित सलाह के आधार पर ही बुलाते हैं। अनुच्छेद 72(1) राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह समय-समय पर संसद के सत्र को आहूत करें। वर्तमान परिस्थितियों में इस संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है।
अध्यक्ष की कुर्सी पर सस्पेंस: कौन करेगा सत्र का संचालन?
संसदीय परंपरा के अनुसार, पिछली संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) ही नए सत्र की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हैं। यदि अध्यक्ष उपलब्ध न हों, तो उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक सदन का संचालन करते हैं। लेकिन बांग्लादेश में इस समय स्थिति काफी जटिल है। पूर्व स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी पहले ही इस्तीफा दे चुकी हैं और फिलहाल वह अज्ञात स्थान पर हैं। वहीं, डिप्टी स्पीकर शमसुल हक तुकु जेल में बंद हैं।
संवैधानिक संकट और प्रोटोकॉल
स्पीकर और डिप्टी स्पीकर दोनों की अनुपस्थिति में पहले सत्र की अध्यक्षता कौन करेगा, इसे लेकर कानूनी विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज है। आमतौर पर ऐसी स्थिति में सदन के वरिष्ठतम सदस्यों के पैनल में से किसी एक को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी दी जा सकती है। 12 मार्च को होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह बांग्लादेश के नए राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा।
