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ना वैक्सीन, न रोजगार, मजबूर जनता झेले कोरोना की मार, क्या कर रही है जयराम सरकार- सूरज शर्मा

करोना महामारी के इस कठिन दौर में जब इंसान को इंसान की नितांत आवश्यकता है। वहीं पर इंसान को उसी तर्ज पर हर एक सुविधा की भी जरूरत होती है। लेकिन जब समय बहुत ही संवेदनशील हो, यानी महामारी और अकाल के ग्रास से जनता ग्रसित हो। ऐसे समय में ही सरकारों की असली परीक्षा की घड़ी होती है। उनके लिए यही पल होते हैं जिसमें सरकार और दूसरी सामाजिक संस्थाएं पास और फेल होती देखी गई है। क्योंकि नर सेवा नारायण सेवा इससे बढ़कर मानवता और इंसानियत कुछ और नहीं हो सकती। ऐसी  घड़ी है आज देश और प्रदेश के सामने। जिस तरह  से प्रदेश में  करोना की द्वितीय लहर अपने प्रचंड रूप को दिखा रही है और जनता इसका  सीधे सीधे शिकार होती  जा रही है।

ऐसी  संवेदनशील घड़ी में कहीं ना कहीं प्रदेश सरकार की इस ओर  बरती जा रही ढील और खामियों को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जिसके तहत जनता खासकर करोना संक्रमित मरीजों को बुरी तरह से सुविधाओं से महरूम होते हुए देखा जा रहा है। वहीं लोगों को सुविधाएं नही उपलब्ध होने की स्थिति में जैसे ऑक्सीजन का पर्याप्त मात्रा और समय में उपलब्ध न होना। सरकारी चिकित्सालयों में  पर्याप्त बेड न मिलना। समय पर वैक्सीन उपलब्ध न होना। इतना ही नही चिकित्सालयों में दाखिल मरीजों की करोना रिपोर्ट्स ही समय पर उपलब्ध नही हो पा रही है। इस संदर्भ में सरकार भी किसी तरह की खास कोशिश करती नजर नही आ रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर जय राम जो इस भयंकर करोना कॉल में भी  हेलीकॉप्टर में महंगा सफर तय करने के बावजूद भी प्रदेश का दौरा  कर रहे हैं। ऐसे सफर के क्या नतीजे निकल रहे हैं ये सोचने वाली बात है।

कहा तो ये जा रहा है कि मुख्यमंत्री करोना मरीजों के बेहतर इलाज हेतु प्रदेश में करोना को लेकर इंतजामांतो का ऑन द स्पॉट जायजा ले रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री इन इंतजामो का जायजा लेकर क्या खोया क्या पाया। उसका भी तो सार्वजनिक रूप से  खुलासा होना चाहिए  था। क्या हो रहा है, कितना हुआ है और क्या होना चाहिए इत्यादि। इस भयंकर करोना महामारी के मध्य नजर क्या मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में  सरकार के मंत्रियों और विधायकों की भी जिम्मेवारी  तय की है। जिसके चलते मंत्री संबंधित अधिकारियों के साथ गांव गांव जाकर जनता तथा मरीजों को हर प्रकार की सुविधानुसार उनकी मदद करते  दिखाई देते और अपना विलासितापूर्ण जीवन छोड़कर  रात दिन  फील्ड में अपना डेरा जमाते?

जिस तरह  दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर वहां के मंत्रियों और विधायको को  रात दिन जनता और मरीजों के मध्य फील्ड में डटे हुए दिखाई दे रहे हैं तथा वहां पर जनता को हर सुविधा प्रदान करने में वो लोग कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यहां तक की  दिल्ली सरकार ने मरीजों को बचाने हेतु फ्रांस और विश्व के दूसरे देशों तक से ऑक्सीजन की सप्लाई को सुनिश्चित किया है। जबकि मोदी सरकार ने दिल्ली को कोर्ट की फटकार के बाद भी अभी तक ऑक्सीजन मुहया करवाने में ढुलमुल रुवया अपनाया हुआ है। मरीजों को मरने दिया जा रहा। मरीजों के तामीरदार खासे परेशान हैं। इससे बढ़कर और  क्या सेवा भाव और समाज सेवा हो सकती है, मोदी सरकार के तानाशाई रवैये के चलते।

हिमाचल प्रदेश में भी जयराम ने पिछले कल आनन-फानन में 17, मई 2021 तक जो कर्फ्यू  धारा 144  के तहत लगाने का एलान किया है।जिसका सारे का सारा दारोमदार संबंधित जिलों के उपायुक्तो एवं अधिकारियों के कंधों पर होगा। जबकि होना तो यह भी चाहिए था कि उन जिला के मैजिस्ट्रेटो के साथ जनता के प्रतिनिधि होने की  हैसियत के चलते मंत्रीयों और विधायकों की भी ड्यूटी लगती। क्योंकि वो  क्या सिर्फ चुनावों के दौरान ही गली कूचों में घूम सकते हैं और बड़ी बड़ी लोक लुभावनी घोषणाएं करते फिरते है। दरसलत में उनकी जरूरत तो ऐसे समय में ही उचित रहती। ताकि कहीं कोई  कमी न रह जाए। ये सुनिश्चित होना चाहिए।

ऐसे समय में मंत्रिमंडल की कल की बैठक में मुख्यमंत्री से प्रदेश के  कई प्रभावित वर्गों को बेसब्री से भी इंतजार था कि मुख्यमंत्री उनके हित में भी कुछ निर्णय करेंगे। जैसेकि प्रदेश के टैक्सी चालको, ऑटो चालकों, निजी बस ऑपरेटर्स जो पिछले 1 साल से लेकर प्रदेश से सरकार से उनके टैक्स माफी सहित वर्किंग कैपिटल ग्रांट जारी करने तथा दिल्ली सरकार की तर्ज पर उन्हे करोना काल में मंदे हुए पड़े धंधे की भरपाई करने इत्यादि जैसी बुनियादी मांगे जिसकी सरकार को घोषणा करनी थी। पर दुर्भाग्यवश ऐसा न हो सका। परिणामस्वरूप आलम यह हुआ कि निजी बस ऑपरेटरों ने विरोध में अपनी बसों को सड़क पर  ही खड़ा कर दिया है और खुद हड़ताल पर चले गए।

आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश उनका समर्थन करते हुए सरकार से फिर  अनुरोध किया है कि उनकी जायज मांगों को तुरंत प्रभाव से मान लिया जाए। ताकि आवाजाही में जनता को और  किसी प्रकार की परेशानी का  सामना ना करना पड़े। क्योंकि प्रदेश सरकार का जो परिवहन निगम है वहां पर बसों का अंबार है लेकिन चालकों ओर परीचालकों के अभाव के चलते बसें जरूरत के मुताबिक चलाई नहीं जा रही है और जो चलाई जा रही हैं वो बहुत कम है।उसमे फिर वही  50% बैठने की क्षमता रखी है। इससे लोगों में उनके गंतव्य तक पहुंचने में और परेशानी हो रही है। क्योंकि परिवहन निगम  की लापरवाही के चलते ज्यादा बसों के न चलाएं जाने से जनता परेशान होने को मजबूर हो रही है।

कैबिनेट में खास फैसला न होने के कारण इसी कड़ी में वैक्सीन की कमी के चलते 18 से 45 साल की उम्र के बीच के युवाओं को वैक्सीन लगने का जो निर्धारित कार्यक्रम रखा गया था। जो वैक्सीन की कमी के चलते धरा का धरा रह गया। लेकिन विडंबना तो देखिए सरकार की। प्रदेश के एक कद्दावर मंत्री की बेटी को विशेष रुप से उक्त वैक्सीन लगवाई गई। जोकि चढ़ते सूरज को सलाम करने जैसा वाक्य प्रकाश में आया है। इसे यदि सरकारी दादागिरी  कहा जाए तो भी गलत न होगा।इससे युवाओं में गलत संदेश तो गया ही है बल्कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क देखने को मिला तथा सरकार की पोल भी खुलती हुई प्रकाश में आई। इतना ही नही प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में वक्त की नजाकत को समझते हुए मुख्यमंत्री को उन विभागों और निगमो, खासकर परिवहन निगम के कर्मचारियों द्वारा सरकार से बार बार आग्रह करने पर भी उनको वेतन और पेंशन नही मिल रही है। उसकी घोषणा भी नही हुई उन कर्मचारियों ने भी आखिर अपने परिवार का गुजर-बसर करवाना होगा। उन्हे भी इंतजार था कि मुख्यमंत्री जी उनके बारे में कुछ पुख्ता घोषणा करते। उपर से उन्हे करोना का खौफ?
सरकार की  इस बेरूखी के चलते करोना महामारी में भी उन कर्मचारियों द्वारा खुद का कमाया हुआ पैसा ही नही उन्हे लौटा रही है। मदत  तो क्या करनी।

इनके साथ इस तरह का जो बेरहम अन्याय का आलम पसरता जा रहा है। उसका भगवान ही मालिक है। शिमला से  जारी प्रैस को दिए एक बयान में  प्रदेश आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सूरज शर्मा ने प्रदेश सरकार के माननीय मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए कहा है की इस मुश्किल घड़ी में भी वो अगर जनता के साथ खड़े नहीं होंगे तो ऐसी सरकार का जनता को क्या फायदा।

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