हिमाचली किसानों के साथ मजाक, किसी को 77 तो किसी की 120 रुपये मिला मुआवजा

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Himachal News: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की राशि मिलने के बाद किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सोलन जिले के देवठी के रहने वाले किसान रामदत्त ने 107 रुपये की राशि सकल प्रीमियम के रूप में जमा करवाई थी। जब मौसम की वजह से टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा तो बीमा कंपनी ने रामदत्त को मात्र 76.80 रुपये मुआवजा दिया। इसी प्रकार गोयला के किसान जय सिंह ने भी 168 रुपये सकल प्रीमियम राशि जमा करवाई थी, लेकिन मुआवजे के रूप में 120 रुपये ही मिले।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कुल 3547 ऐसे किसान हैं, जिन्हें मुआवजा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 1500 किसानों को सकल प्रीमियम के बराबर भी मुआवजा नहीं मिला है।

इन्हें 75 से 966 रुपये मुआवजा मिला है। इस सबकी वजह से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर किसान सवाल उठने लगे हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिला सोलन में टमाटर की फसल के सकल प्रीमियम के रूप में करीब 91.52 लाख रुपये जमा हुए, लेकिन किसानों को मुआवजे के रूप में 65.41 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया। किसानों को बीमा के रूप में भुगतान की गई राशि सकल प्रीमियम की 71.46 फीसद ही बनती है। सकल प्रीमियम के रूप में जमा राशि में किसानों का हिस्सा करीब 27.24 लाख रुपये और बाकी केंद्र व प्रदेश सरकार का है।

खास बात यह है कि जिला सोलन में 3547 किसानों ने करीब 544 हेक्टेयर भूमि पर लगाई की टमाटर की फसल का 5.44 करोड़ रुपये का बीमा करवाया था।

नुकसान के आधार पर मुआवजा

कृषि विभाग के उपनिदेशक राजेश कौशिक का कहना है कि किसानों को मुआवजे की राशि नुकसान के मुताबिक दी जाती है। ऐसा हो सकता है कि किसी किसान ने सकल प्रीमियम की राशि अधिक दी हो और मुआवजा कम मिला हो।

किसान देता है पांच फीसद प्रीमियम

सकल प्रीमियम की राशि का पांच फीसद किसान से लिया जाता है, जबकि 95 फीसद प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से बीमा कंपनी को दिया जाता है। यदि किसी किसान ने 1000 रुपये का फसल बीमा करवाया है तो 50 रुपये किसान से लिए जा रहे हैं, जबकि 950 रुपये सरकार की ओर से दिए जाते हैं।

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