Himachal News: डिजिटल युग में Cyber Crime को अंजाम देने के लिए ठग अब बेहद शातिर तरीके अपना रहे हैं। वे आम लोगों के सोशल मीडिया प्रोफाइल और बैंक खातों को किराए पर लेकर बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी की आड़ में लोगों को मार्केटिंग का झांसा दिया जाता है। उन्हें जल्दी और अधिक पैसा कमाने का लालच देकर उनके अकाउंट्स का नियंत्रण हासिल कर लिया जाता है। इस धोखाधड़ी में फंसने वाले लोग अक्सर अपनी डिजिटल पहचान और पैसा दोनों खो देते हैं।
सोशल मीडिया और बैंक खातों का गलत इस्तेमाल
साइबर अपराधी अब सीधे ठगी करने के बजाय लोगों के खातों का उपयोग ‘लेयरिंग’ के लिए कर रहे हैं। वे फेसबुक या टेलीग्राम पर विज्ञापन देते हैं कि आपका अकाउंट इस्तेमाल करने के बदले हर महीने 10 से 15 हजार रुपये दिए जाएंगे। कई देशों में प्रोफाइल किराए पर देना वैध है, लेकिन भारत में अपराधी इसका इस्तेमाल Cyber Crime के पैसे को इधर-उधर करने में कर रहे हैं। वे विशेष रूप से यूपीआई (UPI) खातों का उपयोग करते हैं ताकि प्रशासन असली अपराधी तक न पहुंच सके।
एसपी साइबर क्राइम ने दी सख्त चेतावनी
हिमाचल प्रदेश के एसपी साइबर क्राइम रोहित मालपानी ने इस बढ़ते खतरे पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि जब कोई यूजर अपना लॉगिन क्रेडेंशियल साझा करता है, तो वह अपने ईमेल का नियंत्रण भी खो सकता है। इससे भविष्य में बड़े वित्तीय नुकसान की आशंका बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी कभी भी आपके अकाउंट का पासवर्ड या लॉगिन एक्सेस नहीं मांगेगी। लॉगिन क्रेडेंशियल्स की मांग करना ही धोखाधड़ी का सबसे बड़ा संकेत है।
किराए पर अकाउंट देने के भयानक परिणाम
अगर आपके सोशल मीडिया अकाउंट से कोई गलत जानकारी फैलाई जाती है या बैंक खाते से अवैध लेनदेन होता है, तो पुलिस आपको ही पकड़ेगी। चूंकि अकाउंट आपके फोन नंबर या ईमेल से लिंक होता है, इसलिए कानून की नजर में आप ही मुख्य संदिग्ध माने जाएंगे। टेलीग्राम पर कई ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर युवाओं को फंसा रहे हैं। एक बार लॉगिन मिलते ही वे बातचीत डिलीट कर देते हैं और आपके अकाउंट का दुरुपयोग शुरू हो जाता है।
