New Delhi: भारतीय थाली बिना दाल के अधूरी मानी जाती है। दाल को हमेशा से एक हेल्दी डाइट (Healthy Diet) का हिस्सा माना गया है। घर के बड़े-बुजुर्ग हमेशा दाल खाने की सलाह देते हैं क्योंकि इसमें प्रोटीन और फाइबर भरपूर होता है। लेकिन क्या दाल खाने के बाद आपको भी पेट फूलने या भारीपन की शिकायत होती है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। कई लोगों को दाल खाने के बाद गैस एसिडिटी (Gas Acidity) और अपच जैसी समस्याएं होती हैं। लोग अक्सर दाल को ही इसका दोषी मानते हैं। मगर न्यूट्रिशनिस्ट निकिता बर्दिया के मुताबिक, समस्या दाल में नहीं, बल्कि आपके पाचन तंत्र में हो सकती है। यह इस बात का इशारा है कि आपका डाइजेशन सिस्टम कमजोर पड़ रहा है।
ये दालें हैं पेट के लिए अमृत
हर दाल की तासीर अलग होती है। जरूरी नहीं कि हर दाल आपको सूट करे। अगर आपका पेट कमजोर है, तो आपको दालों का चुनाव सावधानी से करना चाहिए। मूंग की दाल पेट के लिए सबसे हल्की मानी जाती है। यह बहुत जल्दी पच जाती है और इससे गैस एसिडिटी की समस्या नहीं होती। यही कारण है कि मरीजों और बच्चों को सबसे पहले मूंग दाल दी जाती है। इसके अलावा मसूर की दाल भी बहुत फायदेमंद है। अगर मसूर दाल को बिना छिलके के पकाया जाए, तो यह पेट साफ रखने में मदद करती है। अरहर या तूर दाल भी एक अच्छा विकल्प है। इसमें प्रोटीन की मात्रा काफी अच्छी होती है। अगर इसे सही तरीके से पकाया जाए, तो यह रोजाना खाने के लिए बेहतरीन है।
इन दालों से बना लें थोड़ी दूरी
कुछ दालें पचने में बहुत भारी होती हैं। काबुली चना और काला चना इन्हीं में शामिल हैं। इनमें फाइबर की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। अगर इन्हें ठीक से न पकाया जाए, तो ये पेट में भारीपन पैदा करती हैं। राजमा और उड़द की दाल भी पचने में काफी समय लेती है। कमजोर पाचन वाले लोगों को इनके सेवन से बचना चाहिए। ये दालें आंतों पर दबाव डालती हैं। मटर या सूखी मटर भी अक्सर पेट में गैस बनाने का काम करती है। जिन लोगों को अक्सर गैस एसिडिटी रहती है, उन्हें रात के समय इन भारी दालों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
पकाने का सही तरीका जानें
दाल खाने का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही ढंग से पकाया जाए। दाल बनाने से पहले उसे कुछ देर पानी में जरूर भिगोएं। इससे दाल के भारी तत्व निकल जाते हैं। पकाते समय हींग, जीरा और अजवाइन का तड़का जरूर लगाएं। अदरक का इस्तेमाल भी पाचन के लिए अच्छा होता है। ये मसाले भोजन को पचाने में मदद करते हैं। कोशिश करें कि दाल बहुत ज्यादा गाढ़ी न हो। तली-भुनी दालों की जगह सादी दाल को अपनी डाइट में शामिल करें। अगर आप इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाते हैं, तो दाल से होने वाली पेट की परेशानियों से आसानी से बचा जा सकता है।
सेंसिटिव पेट वालों के लिए सलाह
जिन लोगों का पेट बहुत संवेदनशील है, उनके लिए मूंग और मसूर दाल सबसे सुरक्षित विकल्प हैं। राजमा या छोले जैसी चीजें पेट में सूजन बढ़ा सकती हैं। मूंग दाल आंतों को शांत रखती है और पाचन तंत्र को आराम देती है। सही दाल का चुनाव करके आप बिना किसी डर के अपने भोजन का आनंद ले सकते हैं।
