डेंगू के प्रति रहें सजग व सावधान- प्रवीन कुमार

बिलासपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिलासपुर डॉ० प्रवीन कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि आमजन को कोविड-19 के साथ-साथ डेंगू से बचने के लिए जागरूक रहने की आवश्यकता है क्योंकि डेंगू पिछले कुछ वर्षों में बिलासपुर में फैला था। जुलाई से सितम्बर माह तक बारिश के मौसम में हमें डेंगू से बचाव व रोकथाम के पहलुओं के बारे में लगातार जागरूक रहना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से भी खंड स्तर तक डेंगू से बचाव के लिए समय अनुसार फॉगिंग कराई जाती हैं।

डेंगू के बारे में जाने –
डेंगू के कारण होने बाला बुखार अधिकतर बरसात के महीनों जुलाई, अगस्त व सितम्बर में होने वाला रोग है। यह चार प्रकार के विषाणुओं से एडीस नामक मादा मच्छर के काटने पर फैलता है। एडीस मादा मच्छर डेंगू से ग्रसित व्यक्ति को काट कर 8 से 10 दिनों में खुद संक्रमित हो जाता है, जब वह स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो एक किस्म के विषाणू के संक्रमण से उसे 5-6 दिन में रोग के लक्षण व्यक्ति का चेहरा लाल, उच्च बुखार, सिर, मांसपेशी तथा जोड़ दर्द, आंखो को हिलाने डुलाने में दर्द, चेहरे, गले तथा छाती पर लाल चकत्ते, मितली व उल्टी आने शुरू हो जाते हैं। ऐसे में शीघ्र डाक्टर से सम्पर्क करें, 5 से 7 दिन में सामान्य उपचार से रोगी ठीक हो जाता है।

डेंगू रक्तस्रावी बुखार-
डेंगू के एक से अधिक विषाणुओं के संक्र्मण से अति तीब्र किस्म का रक्तस्रावी डेंगू बुखार हो जाता है जिसमें रोगी के नाक, मसूड़ों और योनि से रक्तस्राव और काले रंग का मल और लाल मूत्र आने के लक्षण प्रकट होते है, ऐसे में रोगी को तुरन्त नजदीकी अस्पताल में दाखिल करवाने की जरूरत होती है अन्यथा यह स्थिति घातक हो जाती है।

डेंगू प्रसार के कारण

 ग्लोबल वार्मिंग, अनियोजित शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि, मच्छर नियन्त्रण के लिए कमजोर अभियान, कमजोर कूड़ा कचरा समापन व साफ-सफाई व्यवस्था से डेंगू बुखार के प्रसार में हर वर्ष वृद्धि हो रही है।

बचाव एवं रोकथाम

पानी की टंकियों व हौदी पर फिट कर के ढ़क्कन लगाएं। पानी की टंकी के हवा निकासी पाइप पर जाली लगाएं। पक्षियों को पानी पिलाने वाले वर्तन को प्रतिदिन साफ कर दोबारा पानी भरें। गमलों, मनी प्लांट आदि के पौधों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें। खुले में पडे पुराने बर्तनों, टायरों, टयूवों आदि में पानी न भरनें दें उनको सही जगह रखें । कुलरों को सप्ताह में दोबारा पानी भरने से पहले इन्हें अच्छी तरह पोंछ व सूखा कर ही पानी डालें।दिन के समय मच्छरों से काटे जाने से बचाव के लिए पूरे बाजू वाले कपड़े पहनें। दिन को घरों में मौरटीन आदि का प्रयोग करे। कीटनाशी से उपचारित मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाली क्रीम का प्रयोग करें,
दरवाजे व खिड़की पर जाली का प्रयोग करें। छोटे गढों को मिट्टी से भर कर, बड़े गढों में खड़े पानी में मिट्टी का तेल या प्रयोग किए गए मूवआयल की बूंदे डाल कर या मच्छर द्वारा अण्डे देने के स्थानों पर लार्वा भक्षक गंम्बूजिया मछली डाल कर, मच्छर के लार्वा पैदा होने पर रोक लगाई जा सकती है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि प्रयोगशाला में रक्त की जांच से रोग का पता लगाया जाता है। डेंगू का कोई विशेष उपचार नहीं है, रोगी को लक्षण के आधार पर दवा की जरूरत होती है । शरीर के तापमान को कम करने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें । दर्द निवारक दवाई का सेवन कदापि न करें चिकित्सक की सलाह के बगैर कोई भी दवा न लें। किसी प्रकार का बुखार होने पर नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करवाऐं।  

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