शनिवार, जनवरी 10, 2026
1.8 C
London

ज्वेलरी दुकानों पर बैनर: ‘बुर्के में महिलाओं का प्रवेश वर्जित’, जानें मौलाना का क्या है जवाब

India News: देश के कुछ इलाकों में ज्वेलरी दुकानों पर विवादास्पद बैनर लगे हैं। ये बैनर बुर्का या नकाब पहनने वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाते हैं। झांसी और झारखंड से इस तरह की खबरें सामने आई हैं। इससे सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। विरोध में एक बड़ा वीडियो बयान सामने आया है।

जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर इन बैनरों का विरोध किया। मौलाना ने कहा कि यह पाबंदी महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। यह एक तानाशाही सोच को दर्शाती है। किसी दुकानदार को यह अधिकार नहीं है कि वह पहनावा तय करे।

मौलाना ने कहा- यह खुला भेदभाव है

मौलाना कारी इसहाक गोरा ने अपने बयान में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ महिला सशक्तिकरण की बात होती है। दूसरी तरफ महिलाओं को पहनावे के आधार पर अपमानित किया जा रहा है। यह खुला भेदभाव है। इससे किसी भी तरह सहमति नहीं बनाई जा सकती।

यह भी पढ़ें:  Supreme Court of India: जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर सुनवाई आज, संसद में महाभियोग पर होगी चर्चा

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्दा किसी एक धर्म की बात नहीं है। भारत की परंपरा में विभिन्न समुदायों की महिलाएं पर्दा करती आई हैं। ग्रामीण इलाकों में आज भी कई महिलाएं घूंघट करती हैं। समाज ने इसे हमेशा स्वीकार किया है। सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाना गलत है।

दुकानदारों के बहिष्कार की अपील

मौलाना ने महिलाओं से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसे दुकानदारों का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार करना चाहिए। जो दुकानदार महिलाओं की इज्जत नहीं करता, उससे खरीदारी नहीं करनी चाहिए। आर्थिक नुकसान होने पर ही ऐसे लोग अपनी सोच बदलेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला केवल पहनावे का नहीं है। यह एक विशेष समुदाय की महिलाओं को निशाना बनाने की सोच है। समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो समाज में नफरत बढ़ेगी। सामाजिक विभाजन और गहरा हो सकता है।

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

मौलाना ने शासन और प्रशासन से भी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि भेदभावपूर्ण बैनर लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। देश का संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है। धर्म या पहनावे के आधार पर भेदभाव कानूनन गलत है।

यह भी पढ़ें:  जस्टिस वर्मा: महाभियोग पर सभी दल एकमत, रिजिजू बोले- भ्रष्टाचारी जज के साथ कौन खड़ा होगा

उन्होंने सभी समाज के लोगों से अपील की। उन्होंने आपसी भाईचारा बनाए रखने को कहा। महिलाओं के सम्मान की रक्षा करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि ऐसे मामले सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं।

इस पूरे मामले ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। नागरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर चर्चा तेज हुई है। विभिन्न संगठनों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपना रुख स्पष्ट किया है।

सामाजिक एकता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। ऐसे विवादास्पद कदम समाज के ताने-बाने को कमजोर करते हैं। सभी धर्मों और समुदायों के लोगों को मिलजुल कर रहना चाहिए। भेदभाव की कोई भी घटना देश की एकता के लिए खतरा है।

Hot this week

Related News

Popular Categories