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बांग्लादेश: तुर्की की घातक Cirit मिसाइलों की खरीद से भारत के लिए बढ़ा खतरा, अंतरिम सरकार ने बदली रक्षा नीति

International News: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के बाद सत्ता में आई अंतरिम सरकार ने रक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत से दूरी बनाकर तुर्की जैसे नए साझेदारों की ओर रुख किया है। बांग्लादेश अब तुर्की निर्मित घातक Cirit मिसाइलें खरीदने की प्रक्रिया में है।

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव

शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद दोनों पड़ोसी देशों के संबंध नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। सीमा विवाद और अल्पसंख्यक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हाल के महीनों में बहस तेज हुई है। इस पृष्ठभूमि में बांग्लादेश का तुर्की से उन्नत हथियार खरीदना भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है।

तुर्की के पाकिस्तान के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते हैं। बांग्लादेश का तुर्की की ओर झुकाव भारत के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर सकता है। विश्लेषक इस कदम को बांग्लादेश द्वारा स्वायत्त सैन्य शक्ति बनने की इच्छा मानते हैं। पर इससे क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

Cirit मिसाइल की ताकत

तुर्की की कंपनी रोकेटसान द्वारा निर्मित Cirit मिसाइल अत्याधुनिक हथियार है। यह लेजर मार्गदर्शन प्रणाली से लैस है जिससे निशाना चूकने की संभावना बहुत कम रहती है। इस मिसाइल का वजन मात्र 15 किलोग्राम है और यह आठ किलोमीटर तक सटीक वार कर सकती है।

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इसे हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी वाहनों से दागा जा सकता है। यह हल्के बख्तरबंद वाहनों और दुश्मन चौकियों को नष्ट करने में कारगर है। बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति में इस तरह की मिसाइलें विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकती हैं।

व्यापक रक्षा सौदों की योजना

बांग्लादेश सिर्फ मिसाइलें ही नहीं खरीद रहा है। वह तुर्की के T129 ATAK अटैक हेलिकॉप्टर और यूरोफाइटर जेट लेने की भी योजना बना रहा है। देश छह तुर्की हेलिकॉप्टर खरीदने के अंतिम चरण में है। इन हेलिकॉप्टरों पर Cirit मिसाइलें लगाई जाएंगी।

अंतरिम सरकार का लक्ष्य तुर्की प्रौद्योगिकी की मदद से स्थानीय रक्षा उद्योग विकसित करना है। बांग्लादेश रक्षा परिसरों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह देश को रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम है।

सैन्य मजबूती के पीछे तर्क

बांग्लादेश सरकार इन तैयारियों को म्यांमार के साथ सीमा विवाद के संदर्भ में पेश कर रही है। पर इन हथियारों की तैनाती भारत की सीमाओं के नजदीक की जा रही है। इससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदलने की आशंका पैदा हो गई है।

देश की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद रक्षा मंत्रालय ने हथियार खरीद के लिए भारी बजट आवंटित किया है। इससे सरकार की प्राथमिताओं का पता चलता है। बांग्लादेश अपनी वायु सेना को चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से लैस करना चाहता है।

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दक्षिण एशिया में बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य

तुर्की की दक्षिण एशिया में बढ़ती दखलंदाजी एक नए प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है। उसने पहले पाकिस्तान को सैन्य ड्रोन दिए थे। अब बांग्लादेश के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहा है। इससे क्षेत्र में शक्ति समीकरण बदल रहा है।

भारत के लिए यह स्थिति सतर्कता बरतने की मांग करती है। देश को अपनी सीमा सुरक्षा और कूटनीतिक रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। हथियारों की इस नई होड़ से दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए संभावित चुनौतियां

बांग्लादेश द्वारा तुर्की से हथियार खरीदने का निर्णय सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों की सीमा बांग्लादेश से लगती है। इस इलाके की भौगोलिक बनावट में Cirit जैसी मिसाइलें गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।

इस विकास से भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध मजबूत रहे हैं। नई सैन्य खरीदारी से इन संबंधों में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। अब देखना है कि भारत इस परिस्थिति पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।

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