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बांग्लादेश में फिर दहला हिंदू परिवार, कर्मचारी को बचाने आए मालिक को फावड़े से काट डाला; 3 गिरफ्तार

Dhaka News: बांग्लादेश के गाजीपुर जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। वहां एक हिंदू मिठाई व्यवसायी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। 55 वर्षीय लिटन चंद्र घोष अपने ही कर्मचारी को हमले से बचाने की कोशिश कर रहे थे। तभी हमलावरों ने उन पर फावड़े से जानलेवा वार कर दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ही परिवार के तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना से इलाके में तनाव का माहौल है।

बहस से शुरू हुआ खूनी खेल

यह दिल दहला देने वाली वारदात शनिवार सुबह करीब 11 बजे हुई। लिटन घोष की दुकान ‘बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल’ बारानगर रोड पर स्थित है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब 28 साल का मासूम मियां दुकान पर आया। उसकी बहस दुकान के 17 वर्षीय कर्मचारी अनंत दास से हो गई। देखते ही देखते यह बहस हिंसक हो गई। थोड़ी ही देर में मासूम मियां के माता-पिता भी वहां आ धमके। उन्होंने मिलकर कर्मचारी अनंत दास को पीटना शुरू कर दिया।

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फावड़े के वार से ली जान

दुकान मालिक लिटन चंद्र घोष ने जब अपने कर्मचारी को पिटते देखा तो वह बीच-बचाव करने आए। उन्होंने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। इसी दौरान गुस्साए हमलावरों ने लिटन पर ही हमला बोल दिया। उनके सिर पर फावड़े से जोरदार वार किया गया। चोट इतनी गहरी थी कि लिटन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है।

हिंदुओं पर हमलों से आक्रोश

लिटन घोष की हत्या से स्थानीय हिंदू समुदाय में भारी गुस्सा है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इससे पहले शुक्रवार को भी एक हिंदू युवक की हत्या हुई थी। 30 वर्षीय रिपन साहा एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे। उन्होंने एक कार चालक से पेट्रोल के पैसे मांगे थे। आरोप है कि चालक ने उन्हें कार से कुचल दिया और फरार हो गया। ये घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

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लगातार निशाना बन रहे अल्पसंख्यक

बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने इन हमलों पर गहरी चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही हिंसा बढ़ जाती है। इसका मकसद अल्पसंख्यक मतदाताओं को डराना होता है। साल 2022 की जनगणना के मुताबिक बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी करीब 7.95 प्रतिशत है। भारत सरकार ने भी इन घटनाओं पर अपनी नजर बनाए रखी है। भारत ने उम्मीद जताई है कि ऐसी सांप्रदायिक हिंसा पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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