International News: बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। शरीयतपुर जिले में एक हिंदू व्यवसायी को भीड़ ने जिंदा जलाने का प्रयास किया। घायल व्यक्ति खोकन चंद्र दास का इलाज के दौरान निधन हो गया।
यह हमला नए साल की पूर्व संध्या पर हुआ था। बारह फरवरी को होने वाले चुनाव की घोषणा के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं। पिछले दो सप्ताह में यह चौथा बड़ा हमला है।
घटना का विवरण
खोकन चंद्र दास शरीयतपुर के दामुड्या इलाके में दुकान चलाते थे। वह दवा और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार करते थे। बुधवार रात वह दुकान बंद करके ऑटो रिक्शा से घर लौट रहे थे।
केवरभांगा बाजार के पास एक भीड़ ने उन्हें रोक लिया। हमलावरों ने पहले धारदार हथियारों से उन पर वार किया। फिर उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई।
पीड़ित की मृत्यु
आग लगने के बाद खोकन चंद्र दास ने जान बचाने का प्रयास किया। वह पास के एक तालाब में कूद गए। लेकिन तब तक वह गंभीर रूप से झुलस चुके थे।
गंभीर जलने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बनी रही। अंततः अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है।
चुनाव पूर्व हिंसा का सिलसिला
बारह फरवरी के चुनाव की घोषणा के बाद हिंसा में वृद्धि हुई है। अठारह दिसंबर को मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास की भीड़ ने हत्या कर दी थी। यह घटना भी चुनावी माहौल में हुई थी।
विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका दावा है कि कट्टरपंथी ताकतें जानबूझकर तनाव पैदा कर रही हैं। ध्रुवीकरण और डर का माहौल बनाया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे अत्यंत गंभीर बताया है। शांति और सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया गया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने हिंदू युवक की हत्या को भयावह करार दिया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
पुलिस कार्रवाई और आरोप
दामुड्या थाना पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज किया है। दो स्थानीय युवक रब्बी और सोहाग के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। पुलिस आगे की जांच कर रही है।
मृतक की पत्नी सीमा दास ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पति ने हमलावरों को पहचान लिया था। इसलिए उन्हें जान से मारने की नीयत से जलाया गया।
राजनीतिक संदर्भ
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार चुनाव प्रक्रिया की निगरानी कर रही है। सरकार ने हिंसा की घटनाओं की निंदा की है। लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
विपक्षी दल सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही है। चुनावी हिंसा पर रोक लगाने की मांग की जा रही है।
सामाजिक प्रभाव
इन घटनाओं से अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश कर रहे हैं। व्यवसाय और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
सामाजिक संगठन शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। धार्मिक नेताओं ने शांति और सद्भाव का आह्वान किया है। लेकिन हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है। पिछले चुनावों में भी ऐसी घटनाएं देखी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन नियमित रिपोर्ट जारी करते रहे हैं।
देश के संविधान में सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं। लेकिन व्यवहार में अल्पसंख्यकों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सामाजिक सद्भाव बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है।
यह स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी चिंताजनक है। पड़ोसी देशों ने शांति और सद्भाव बनाए रखने का आह्वान किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस क्षेत्र पर टिकी हैं।
