Washington News: अमेरिका से आई एक खबर ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में रोजगार की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इसका सीधा असर सोमवार को भारतीय Share Market पर देखने को मिल सकता है। दिसंबर में अमेरिकी कंपनियों ने उम्मीद से काफी कम नौकरियां दी हैं। मंदी की आहट और लेबर मार्केट की कमजोरी ने ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
उम्मीद से कम मिलीं नौकरियां
अमेरिकी श्रम विभाग ने हाल ही में नए आंकड़े जारी किए हैं। दिसंबर महीने में वहां केवल 50,000 नई नौकरियां जुड़ी हैं। यह आंकड़ा विशेषज्ञों के अनुमान से काफी पीछे रह गया है। बाजार को उम्मीद थी कि कम से कम 55,000 नई नौकरियां पैदा होंगी। हालांकि, एक राहत की बात यह है कि बेरोजगारी दर में थोड़ी गिरावट आई है। यह नवंबर के 4.6 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत पर आ गई है।
क्यों आई रोजगार में भारी गिरावट
साल 2025 रोजगार के लिहाज से महामारी के बाद सबसे कमजोर साल साबित हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, 2003 के बाद मंदी के सालों को छोड़कर यह सबसे धीमी ग्रोथ है। ऊंची महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों ने कंपनियों के हाथ बांध दिए हैं। इमिग्रेशन और व्यापार नीतियों में बदलाव ने भी Share Market और कंपनियों को सतर्क कर दिया है। इसी वजह से नियोक्ताओं ने नई भर्तियों से हाथ खींच लिए हैं।
किन सेक्टर्स का प्रदर्शन रहा खराब
अमेरिका में सभी सेक्टर्स का हाल एक जैसा नहीं रहा। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर ने अच्छा प्रदर्शन किया और 47,000 नई नौकरियां जोड़ीं। हेल्थकेयर सेक्टर में भी 21,100 लोगों को रोजगार मिला। इसके विपरीत, रिटेल और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भारी मंदी देखी गई। रिटेल में 25,000 और कंस्ट्रक्शन में 11,000 नौकरियां कम हो गईं। इन सेक्टर्स की गिरावट ने कुल आंकड़ों को नीचे गिरा दिया है।
पार्ट-टाइम काम करने की मजबूरी
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है। वहां फुल-टाइम नौकरी पाना अब मुश्किल होता जा रहा है। करीब 53 लाख लोग ऐसे हैं जो पार्ट-टाइम काम करने को मजबूर हैं। ये लोग पूरे समय काम करना चाहते थे, लेकिन उन्हें काम नहीं मिला। कमजोर कारोबारी हालात के चलते कई कंपनियों ने कर्मचारियों के काम के घंटे घटा दिए हैं।
बेरोजगारी के डराने वाले आंकड़े
अमेरिका में बेरोजगारी के आंकड़े अलग-अलग वर्गों में अलग रहे। वयस्कों में बेरोजगारी दर 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई। वहीं, किशोरों के लिए यह दर 15.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। श्वेत वर्ग में बेरोजगारी 3.8 प्रतिशत और अश्वेत समुदाय में 7.5 प्रतिशत रही। करीब 19 लाख लोग लंबे समय से बेरोजगार हैं। ये चुनौतियां बताती हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी दबाव में है, जिसका असर Share Market पर दिखना तय है।

