Delhi News: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मारुति सुजुकी एक बड़ा धमाका करने के लिए पूरी तरह तैयार है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एलान किया है कि कंपनी पर्यावरण दिवस यानी 5 जून को अपनी पहली फ्लेक्स फ्यूल कार लॉन्च करेगी। यह गाड़ी पूरी तरह से देश के ऑटो सेक्टर की तस्वीर बदल देगी।
मारुति सुजुकी हमेशा से भारतीय ग्राहकों की पहली पसंद रही है। कंपनी अब पेट्रोल, सीएनजी और हाइब्रिड के बाद ग्रीन फ्यूल सेगमेंट में कदम रख रही है। यह नई कार 100% इथेनॉल यानी E100 ईंधन पर चल सकेगी। इससे वाहन मालिकों का महंगे पेट्रोल से पीछा छूट जाएगा।
देश की पहली पूरी तरह इथेनॉल से चलने वाली कार
वर्तमान में भारतीय बाजार में एक भी फ्लेक्स फ्यूल फोर-व्हीलर बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है। मारुति सुजुकी की यह आगामी गाड़ी देश की पहली ऐसी कार होगी, जिसमें खास तौर पर तैयार फ्यूल स्टोरेज और एडवांस इग्निशन सिस्टम मिलेगा। यह तकनीक E100 ईंधन को आसानी से सपोर्ट करेगी।
जापान में आयोजित मोबिलिटी शो में सुजुकी ने पहले फ्रोंक्स का फ्लेक्स फ्यूल मॉडल पेश किया था। हालांकि वह मॉडल केवल 85% इथेनॉल मिश्रण यानी E85 को ही सपोर्ट करता था। इसलिए कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी 5 जून को फ्रोंक्स के बजाय वैगनआर का E100 मॉडल ला सकती है।
वैगनआर और फ्रोंक्स के फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप की खूबियां
मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय हैचबैक कार वैगनआर के फ्लेक्स फ्यूल प्रोटोटाइप को पहले भी प्रदर्शित कर चुकी है। इसे E20 और E85 दोनों तरह के ईंधन पर चलाया जा सकता है। कंपनी ने इस अनूठी ग्रीन तकनीक को विकसित करने के लिए एक लंबे समय तक कड़ा अनुसंधान किया है।
दूसरी तरफ फ्रोंक्स फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल में 1.2-लीटर पेट्रोल इंजन का संशोधित वर्जन इस्तेमाल हो सकता है। यह कार जहरीले कार्बन उत्सर्जन को बहुत कम करती है। इसके इंजन कंपोनेंट्स जैसे फ्यूल टैंक, पंप और इंजेक्टर को इथेनॉल-प्रतिरोधी विशेष सामग्री से तैयार किया जाता है ताकि इंजन सुरक्षित रहे।
फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों की कीमत और परफॉर्मेंस के फायदे
इथेनॉल यानी E85 ईंधन की ऑक्टेन रेटिंग 100 से 110 के बीच होती है। यह उच्च क्षमता टर्बोचार्ज्ड इंजनों में बेहतर कम्प्रेशन अनुपात और शानदार बूस्ट प्रदान करती है। स्वच्छ दहन होने के कारण कार के इंजन में घिसाव काफी कम होता है और स्मूथ टॉर्क मिलता है।
विशिष्ट तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा पार्ट्स के कारण ये गाड़ियां सामान्य पेट्रोल वेरिएंट से थोड़ी महंगी हो सकती हैं। इसके बावजूद हर महीने ईंधन पर होने वाले खर्च में बहुत बड़ी बचत होगी। पर्यावरण के लिहाज से भी यह तकनीक प्रदूषण को रोकने में बेहद मददगार साबित होगी।
Author: Karan Kumar


