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34 की उम्र में 20 जैसा जोश! 10 साल से नहीं खाई रोटी-चावल, डायबिटीज के डर से ले लिया यह बड़ा फैसला

Delhi News: खराब लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण आजकल डायबिटीज तेजी से पैर पसार रही है। इस बीमारी से बचने के लिए लोग अब अपनी डाइट में बड़े बदलाव कर रहे हैं। दिल्ली की रहने वाली 34 वर्षीय आकृति गोयल ने भी ऐसा ही एक चौंकाने वाला फैसला लिया है। उन्होंने पिछले एक दशक से रोटी और चावल से पूरी तरह दूरी बना ली है। आकृति एमबीबीएस की छात्रा हैं और अपने इस फैसले को सेहत के लिए बेहतरीन मानती हैं। उनका दावा है कि इस बदलाव से उनके शरीर में गजब की ऊर्जा रहती है।

इंजीनियरिंग छोड़ चुनी डॉक्टरी की राह

आकृति गोयल का सफर काफी दिलचस्प रहा है। वह पहले एक इंजीनियर थीं, लेकिन बाद में उन्होंने मेडिकल फील्ड में जाने का मन बनाया। उन्होंने नीट (NEET) की परीक्षा दी और ऑल इंडिया रैंक 1118 हासिल की। फिलहाल वह दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। आकृति ने सोशल मीडिया पर बताया कि वह पिछले 10 सालों से अपने रोज के खाने में अनाज (रोटी और चावल) का इस्तेमाल नहीं करती हैं। उनके घर में भी आमतौर पर आटा और चावल नहीं खरीदा जाता है।

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रोटी की जगह खाती हैं दाल का चीला

आकृति ने अपनी डाइट में गेहूं की रोटी की जगह मूंग दाल या अन्य दालों के चीले को दी है। वह पिछले दो सालों से हर भोजन में सब्जियों के साथ दाल का चीला ही खाती हैं। उनका कहना है कि इस बदलाव से उनका पाचन तंत्र काफी मजबूत हुआ है। खाने के बाद उन्हें भारीपन या सुस्ती महसूस नहीं होती। डायबिटीज विशेषज्ञों के अनुसार भी दालों में प्रोटीन अधिक और कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है।

परिवार में है डायबिटीज का इतिहास

आकृति ने बताया कि उनके परिवार में डायबिटीज की बीमारी का पुराना इतिहास रहा है। वह खुद इस गंभीर बीमारी का शिकार नहीं होना चाहती थीं। यही वजह है कि उन्होंने समय रहते अपनी डाइट में यह सख्त बदलाव किया। उनका मानना है कि भारत में लोग 30 से 40 की उम्र में अपनी सेहत को नजरअंदाज करते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों का कारण बनती है।

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20 साल के छात्रों से भी ज्यादा फिट

खान-पान में बदलाव के साथ-साथ आकृति अपनी फिटनेस पर भी पूरा ध्यान देती हैं। वह हफ्ते में पांच दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती हैं। उनका दावा है कि उनकी एनर्जी और फुर्ती उनके बैच के 20 साल के छात्रों से भी कहीं ज्यादा है। लगातार कसरत और संतुलित आहार ने उन्हें कभी कमजोरी महसूस नहीं होने दी।

क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

मेडिकल साइंस के अनुसार, गेहूं और चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अधिक होता है। इससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है। वहीं, दालों का जीआई कम होता है और यह देर तक पेट भरे होने का अहसास कराती हैं। आकृति हालांकि दूसरों को पूरी तरह रोटी-चावल छोड़ने की सलाह नहीं देती हैं। उनका कहना है कि जिन लोगों को डायबिटीज का खतरा है, उन्हें अपनी डाइट को लेकर जरूर सतर्क हो जाना चाहिए।

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