Himachal News: सुप्रीम कोर्ट ने शिमला में करोड़ों रुपये की पैतृक संपत्ति हड़पने के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को पूरी तरह पलट दिया, जिसमें आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने साफ कहा कि जब जांच शुरुआती चरण में हो और सबूत जुटाए जा रहे हों, तब अदालती हस्तक्षेप अनुचित है। इस फैसले के बाद अब जमीन हड़पने, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपियों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के फैसले को बताया ‘पूरी तरह अनुचित’
सर्वोच्च न्यायालय ने शिकायतकर्ता शाला बजलील और प्रदेश सरकार की अपीलों को स्वीकार करते हुए कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति मेहता ने फैसले में लिखा कि उच्च न्यायालय ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल समय से पहले ही कर लिया। प्राथमिकी में जालसाजी के आरोप स्पष्ट थे। जांच एजेंसी ने पहले ही 11 विवादित दस्तावेजों की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर केस को बंद करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था। अदालत ने अब जांच अधिकारी को जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बीमार पिता और 49 बीघा जमीन की कहानी
यह पूरा विवाद दिवंगत जीबी बजलील की विशाल पैतृक संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि बलदेव ठाकुर, दलजीत सिंह और जियनपुरी कामसुआन ने मिलकर एक गहरी साजिश रची। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी मां की मृत्यु के बाद उनके पिता की मानसिक और शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी थी। आरोपियों ने इसी लाचारी का फायदा उठाया। उन्होंने बुजुर्ग पिता को बहला-फुसलाकर पारिवारिक संपत्ति और बैंक फंड को अपने नाम करवा लिया। इस साजिश में पारिवारिक विरासत को कौड़ियों के दाम पर बेचने का खेल खेला गया।
बैंक खातों से करोड़ों का हेरफेर और फर्जीवाड़ा
अगस्त 2022 में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, बजलील के बैंक खातों से लगभग 1.18 करोड़ रुपये बिना किसी वैध लेनदेन के दलजीत सिंह को ट्रांसफर किए गए। इतना ही नहीं, परिवार की बेशकीमती 49 बीघा जमीन को साल 2017 में महज 3.9 करोड़ रुपये में बलदेव ठाकुर के नाम कर दिया गया। यह कीमत उस समय की सरकारी ‘सर्किल दर’ से बहुत कम थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के इन गंभीर आरोपों की पूरी जांच होनी जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।


