Tehran News: ईरान में महंगाई की आग अब भीषण हिंसा में बदल चुकी है। देश भर में जारी प्रदर्शनों में 544 लोगों की जान जा चुकी है। इस भारी उथल-पुथल के बीच ईरान ने अमेरिका से बातचीत की पेशकश की है। हालांकि, ईरान ने दो टूक कहा है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बातचीत के संकेत दिए हैं, लेकिन सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है।
स्विट्जरलैंड के जरिए हो रही सीक्रेट बात
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकाफ संपर्क में हैं। दोनों के बीच स्विट्जरलैंड के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसने बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए। हालांकि, उन्होंने अमेरिका पर गंभीरता न दिखाने का आरोप भी लगाया।
ट्रंप का डबल गेम: विपक्ष से भी संपर्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान खुद वार्ता करना चाहता है। इसलिए अमेरिकी अधिकारी उनसे बातचीत कर सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप साथ ही साथ ईरान के विपक्षी नेताओं के संपर्क में भी हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि उनके पास अभी भी सैन्य कार्रवाई का विकल्प मौजूद है।
ईरान में हालात बेकाबू, 11 हजार गिरफ्तार
ईरानी शहरों में 28 दिसंबर से जारी विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सुरक्षाकर्मियों से भिड़ रहे हैं। इस हिंसा में अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हैं। पुलिस ने लगभग 11 हजार लोगों को गिरफ्तार किया है। सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी हैं, जिससे सही खबरें बाहर नहीं आ पा रही हैं।
चार मोर्चों पर लड़ रहा ईरान
तेहरान के इंकलाब चौक पर संसद के स्पीकर मुहम्मद बाकर खलीफा ने एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ईरान इस वक्त चार अलग-अलग मोर्चों पर जंग लड़ रहा है। यह लड़ाई आर्थिक, मनोवैज्ञानिक, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ सैन्य और देश के भीतर आतंकवाद के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ, तो अमेरिकी सैन्य अड्डे और इजरायल उनके निशाने पर होंगे।
मस्जिदों और एंबुलेंस में आगजनी
विदेश मंत्री अरागची ने हिंसा की भयावह तस्वीर पेश की है। उन्होंने बताया कि उपद्रवियों ने 53 मस्जिदों और 180 एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी सच्चा ईरानी नागरिक मस्जिद पर हमला नहीं कर सकता। सरकार का मानना है कि इस हिंसा के पीछे विदेशी एजेंसियों का हाथ है।
यूरोपीय देशों को फटकार
ईरान ने ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और फ्रांस के राजदूतों को तलब किया है। ईरान ने इन देशों में हो रहे ईरान विरोधी प्रदर्शनों पर कड़ी आपत्ति जताई है। तेहरान ने कहा कि गलत सूचनाओं के आधार पर हो रहे ऐसे विरोध प्रदर्शनों को अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। फिलहाल, भारी सुरक्षा के बीच स्थिति को नियंत्रित करने के दावे किए जा रहे हैं।
