New Delhi News: अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच भारत ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लिया है। भारत अब यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ अपनी दोस्ती को नई रफ्तार देने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सख्त तेवरों को देखते हुए नई दिल्ली ने अपने पुराने साथियों की ओर रुख किया है। साल 2026 की शुरुआत में भारत में यूरोपीय नेताओं का जमावड़ा लगने वाला है। यह कूटनीतिक बदलाव दुनिया को एक नया संदेश देगा।
जर्मनी के नए चांसलर का पहला दौरा
विदेश मंत्री एस. जयशंकर अभी फ्रांस के दौरे पर हैं। उनकी वापसी के तुरंत बाद जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आ रहे हैं। जनवरी के तीसरे हफ्ते में होने वाली यह उनकी पहली एशिया यात्रा होगी। फ्रेडरिक मर्ज के साथ भारत रक्षा सहयोग और पनडुब्बी सौदों पर चर्चा करेगा। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी बात होगी। यह मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित नीतियों के खिलाफ एक मजबूत विकल्प तैयार करेगी।
गणतंत्र दिवस पर बनेगा इतिहास
इस बार 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस का समारोह बहुत खास होने वाला है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भारत के राजकीय मेहमान होंगे। ऐसा पहली बार होगा जब ईयू के दो शीर्ष नेता एक साथ परेड में शामिल होंगे। इस दौरान भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी मुहर लग सकती है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इसके लिए जल्द ब्रूसेल्स जाने वाले हैं।
मैक्रों भी लगाएंगे हाजिरी
गणतंत्र दिवस के ठीक दो हफ्ते बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी भारत आएंगे। वह मुंबई और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी और रूस के मुद्दे पर अमेरिका के दबाव ने भारत को सतर्क कर दिया है। भारत अब सिर्फ अमेरिकी बाजार के भरोसे नहीं रहना चाहता। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। एफटीए होने से भारतीय व्यापारियों को अमेरिका के नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी।
