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ग्रीनलैंड पर अमेरिका की नजर: लोगों की नींद हराम, क्या बिक जाएगा यह देश? कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश!

Greenland News: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की बढ़ती गतिविधियों ने वहां के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि स्थानीय लोग मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। ग्रीनलैंड की मंत्री नाजा नाथानिएलसेन ने खुलासा किया कि अमेरिकी संकेतों के कारण लोग रात में ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं। हालांकि, ग्रीनलैंड ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका अमेरिका का हिस्सा बनने का कोई इरादा नहीं है।

हर घर में डर का माहौल

ग्रीनलैंड की व्यवसाय और खनिज संसाधन मंत्री नाजा नाथानिएलसेन ने बताया कि यह मुद्दा अब हर घर की चर्चा का हिस्सा बन चुका है। वहां के लोगों पर भारी मानसिक दबाव है। सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वे अमेरिका के साथ नहीं मिलना चाहते। एक ताजा सर्वे के मुताबिक, ग्रीनलैंड के 85 प्रतिशत लोग अमेरिका का हिस्सा बनने के सख्त खिलाफ हैं। उनका कहना है कि यह देश उनका है और भविष्य का फैसला भी वही करेंगे।

पाकिस्तान 11 साल तक बैठकर खाएगा!

रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रीनलैंड को खरीदने या उसके साथ समझौता करने के लिए अमेरिका बड़ी रकम खर्च कर सकता है। विशेषज्ञों ने ग्रीनलैंड की अनुमानित कीमत 500 से 700 अरब डॉलर बताई है। यह रकम इतनी बड़ी है कि इसमें पाकिस्तान जैसा देश बिना कुछ किए 11 साल तक अपना खर्च चला सकता है। पाकिस्तान का सालाना बजट लगभग 62 बिलियन डॉलर है, जबकि ग्रीनलैंड की कीमत इससे कई गुना ज्यादा है। अमेरिका इस द्वीप को खरीदने के बजाय ‘कॉम्पैक्ट ऑफ फ्री एसोसिएशन’ जैसे समझौते पर भी विचार कर रहा है, जो सीधा खरीदने से सस्ता पड़ेगा।

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दूध मिल रहा है तो गाय क्यों खरीदें?

अमेरिका और डेनमार्क के बीच पुराने रक्षा समझौते मौजूद हैं। इसके तहत अमेरिका वहां अपने सैनिक रख सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने इस स्थिति को एक दिलचस्प उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि “जब दूध सही कीमत पर मिल रहा हो, तो गाय खरीदने की क्या जरूरत है?” यानी जब मौजूदा समझौतों से सुरक्षा जरूरतें पूरी हो रही हैं, तो देश पर कब्जा करना बेकार है। इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन के कुछ लोग ग्रीनलैंड पर मालिकाना हक चाहते हैं। उनका तर्क है कि किरायेदार होने से बेहतर मकान मालिक होना है।

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ट्रंप का ‘मास्टरप्लान’ और चीन का डर

डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में इस मुद्दे को लेकर ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। उन्होंने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत बनाया है। ट्रंप को डर है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड पूरी तरह आजाद हुआ, तो उसकी 27 हजार मील लंबी समुद्री सीमा पर चीन या रूस का प्रभाव बढ़ सकता है। रणनीतिक रूप से यह इलाका अमेरिका के लिए बेहद अहम है। अमेरिका चाहता है कि ग्रीनलैंड, गुआम या प्यूर्टो रिको की तरह उसका एक क्षेत्र बन जाए।

नाटो देश की जमीन पर नजर गलत

अमेरिका के भीतर भी इस जबरन अधिग्रहण का विरोध शुरू हो गया है। कई अमेरिकी सांसदों का कहना है कि नाटो (NATO) के किसी सहयोगी देश की जमीन पर कब्जा करना गलत होगा। सीनेट में एक विधेयक भी लाया गया है, जो रक्षा विभाग को ऐसे किसी कदम के लिए पैसे खर्च करने से रोकता है। उधर, डेनमार्क और यूरोपीय देशों ने साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता बिकाऊ नहीं है।

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