रविवार, जनवरी 18, 2026
7 C
London

अमेरिका बनाम दुनिया: ट्रंप के ग्रीनलैंड कब्जे के ख्वाब ने भड़काई आग, नाटो में हड़कंप

International News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जा करने के इरादों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। यूरोपीय देश और नाटो एकजुट होकर इस कदम का विरोध कर रहे हैं। वहीं ग्रीनलैंड के लोग भी सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जता रहे हैं। इस विवाद ने अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच रिश्तों में नई कटुता पैदा कर दी है।

ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने खुद इस मार्च की अगुवाई की। प्रदर्शनकारी अमेरिकी कॉन्सुलेट के नए परिसर की ओर बढ़े। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि ग्रीनलैंड अपना भविष्य खुद तय करेगा। इस जन आक्रोश ने ट्रंप प्रशासन के इरादों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नाटो देशों ने दिखाई एकजुटता

डेनमार्क केअनुरोध पर नाटो और यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सेना की तैनाती शुरू कर दी है। यह कदम अमेरिकी दबाव के जवाब में उठाया गया है। ट्रंप ने पहले ही ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया था। इसी वजह से यूरोपीय राष्ट्र सतर्क हो गए हैं और अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह अमेरिका और यूरोप की सीमा पर स्थित है। इसके एक ओर रूस है जो आर्कटिक मार्ग से चीन तक कच्चे तेल की आपूर्ति करता है। इस क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को अमेरिका अपने लिए खतरा मानता है।

यह भी पढ़ें:  एपस्टीन फाइल्स: बिल क्लिंटन की पूल पार्टी की तस्वीरों से मचा हल्ला, डोनाल्ड ट्रंप का नाम नदारद

संसाधनों पर नजर

ग्रीनलैंड कई कीमतीखनिज पदार्थों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का प्रमुख भंडार है। अमेरिका नहीं चाहता कि यह संपदा उसके प्रतिद्वंद्वी देशों के हाथ लगे। इसीलिए वह इस क्षेत्र को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक मानता है। अमेरिका का इरादा वहां अपना सैन्य अड्डा स्थापित करने का है।

इतिहास में अमेरिका ने कई बार ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रयास किया है। वर्तमान स्थिति में डील नहीं बनने पर कब्जे की योजना बनाई जा रही है। इस कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है। स्थानीय निवासी भी अपनी संप्रभुता को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। सत्रहवीं शताब्दी से यह डेनमार्क के नियंत्रण में है। अमेरिका इस परंपरागत व्यवस्था को बदलना चाहता है। इस मामले ने डेनमार्क और अमेरिका के रिश्तों में भी खटास पैदा कर दी है।

यह भी पढ़ें:  एलियन मुलाकात: जॉर्ज बुश से 1964 में हुई एलियन मीटिंग का दावा, नई डॉक्यूमेंट्री में हुआ खुलासा

अमेरिकी कॉन्सुलेट फिलहाल एक छोटी लकड़ी की इमारत में चलता है। वहां केवल चार कर्मचारी तैनात हैं। अमेरिका एक नए ब्लॉक में अपना दूतावास स्थानांतरित करने की योजना बना रहा था। इसी निर्माणाधीन स्थल के बाहर प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया।

सैन्य संघर्ष की आशंका

नाटोदेशों की सैन्य तैनाती ने स्थिति और गंभीर बना दी है। यह एक सैन्य गठबंधन के भीतर ही उभरता हुआ संकट है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विवाद आर्कटिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह एक नया मोड़ साबित हो रहा है।

ग्रीनलैंड के लोगों का आक्रोश केवल सड़कों तक सीमित नहीं है। स्थानीय प्रशासन और सरकार ने भी अमेरिकी दबाव को ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि उनकी भूमि बिकाऊ नहीं है। यह जनमत अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी हासिल कर रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने विश्व राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। बड़ी शक्तियों के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। आने वाले समय में इस मामले में और उछाल आने की संभावना है। सभी पक्ष अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।

Hot this week

हिमाचल में बिजली प्रोजेक्ट्स पर सरकार का बड़ा फैसला आज, क्या मिलेगी टैक्स में छूट?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार जलविद्युत परियोजनाओं को बड़ी...

UGC Big Update: अब कैंपस में SC, ST और OBC की जाति पूछना पड़ेगा भारी, डिग्री रोकने तक की सजा!

New Delhi: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा...

Related News

Popular Categories