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अंबाला: स्कूलों को बम धमकी, पुलिस हाई अलर्ट पर, दिल्ली जैसी घटना की आशंका

HARYANA NEWS: अंबाला में सोमवार को कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। स्कूल परिसरों में बड़े पैमाने पर सुरक्षा जांच की गई। पुलिस अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। रिवरसाइड डीएवी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल ने इसकी पुष्टि की है।

रिवरसाइड डीएवी पब्लिक स्कूल, अंबाला कैंट की प्रिंसिपल सीमा दत्त ने बताया कि एक अनजान ईमेल प्राप्त हुआ था। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिसकर्मी त्वरित रूप से घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने पूरे स्कूल परिसर की गहन तलाशी ली।

प्रिंसिपल दत्त ने कहा कि वर्तमान में सभी अलर्ट पर हैं। कुल तीन स्कूलों को इस तरह का धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ है। पुलिस ने सभी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद कर दी है। अभिभावकों और छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

इस मामले में आगे की जानकारी का इंतजार है। पुलिस ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हुई है। साइबर सेल भी इस मामले की जांच कर रही है। अधिकारी कहते हैं कि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक संपत्ति के खिलाफ अपराध हैं।

दिल्ली में भी मिली थी ऐसी ही धमकी

इससे पहले दिसंबर महीने में दिल्ली के कई स्कूलों को भी बम की धमकी मिली थी। दिल्ली पुलिस ने उसकी पुष्टि की थी। उस समय भी धमकी भरे ईमेल संस्थानों को मिले थे। स्कूल प्रशासन ने तुरंत अभिभावकों को सूचित किया था।

दिल्ली की घटना में स्कूलों ने छात्रों को चरणबद्ध तरीके से घर भेजा था। उन्होंने माता-पिता को अपने बच्चों को ले जाने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में घबराहट न फैलाने पर जोर दिया गया था। इसी तरह की सावधानी अंबाला में भी बरती जा रही है।

दिल्ली पुलिस ने बताया था कि दोनों संस्थानों को एक ही समय पर ईमेल मिले। पुलिस की कई टीमें बम निरोधक दस्ते और कुत्तों के साथ मौके पर पहुंची थीं। हालांकि तलाशी के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली थी। अंबाला में भी अब तक कुछ नहीं मिला है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

अंबाला पुलिस ने स्कूलों के आसपास सुरक्षा के इंतजाम तेज कर दिए हैं। गश्त बढ़ा दी गई है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभव कदम उठा रहे हैं। उनका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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स्कूल प्रबंधन भी पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहा है। उन्होंने अपने अंदरूनी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्त नजर रखी जा रही है। सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की भी जांच की जा रही है।

ईमेल की सामग्री और भेजने वाले के पते की जांच चल रही है। पुलिस के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण मामला है। वे जल्द से जल्द अपराधियों को पकड़ना चाहती है। इस तरह की घटनाएं सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।

स्कूल सुरक्षा दिशानिर्देशों पर फोकस

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही स्कूल सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें आपात स्थिति से निपटने के उपाय शामिल हैं। राज्य सरकारों को इन्हें लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। फिर भी ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था में चुनौतियां दिखाती हैं।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी स्कूल सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने राज्यों से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों का माहौल डरमुक्त होना चाहिए। ऐसी धमकियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्कूलों को नियमित सुरक्षा अभ्यास कराने चाहिए। छात्रों और स्टाफ को आपात प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग देनी चाहिए। स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय बहुत जरूरी है। इससे ऐसी स्थितियों में तेजी से कार्रवाई हो सकती है।

अभिभावकों में चिंता की स्थिति

इस घटना की खबर फैलते ही अभिभावकों में चिंता देखी गई। कई माता-पिता स्कूलों में पहुंचे। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल किए। स्कूल प्रशासन ने उन्हें स्थिति से अवगत कराया। उन्हें विश्वास दिलाया कि सब कुछ नियंत्रण में है।

अधिकारियों ने अभिभावकों से सहयोग की अपील की है। उनसे कहा गया है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। पुलिस ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया हो सकता है।

स्कूलों ने भी अभिभावकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्हें बच्चों को समय पर स्कूल भेजने के लिए कहा गया है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने को कहा गया है। इस सामूहिक जागरूकता से ऐसे मामलों से निपटने में मदद मिलती है।

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कानूनी प्रक्रिया और सजा

भारतीय दंड संहिता के तहत ऐसी धमकियां गंभीर अपराध हैं। धारा 505 और 507 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। साइबर धमकियों पर आईटी एक्ट के प्रावधान भी लागू होते हैं। दोषियों को कड़ी सजा का प्रावधान है।

पुलिस का कहना है कि वे पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। सबूत जुटाए जा रहे हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। आरोपियों के खिलाफ सबूत मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई भी जरूरी है। न्यायालयों को भी इन्हें प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे समाज में एक संदेश जाएगा कि ऐसे अपराध बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर

ऐसी घटनाएं देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा करती हैं। ये आतंकवादी गतिविधियों का संकेत भी हो सकती हैं। इसलिए खुफिया एजेंसियों का सतर्क रहना बहुत जरूरी है। उन्हें ऐसे संदिग्ध लोगों पर नजर रखनी चाहिए।

केंद्रीय एजेंसियां भी राज्य पुलिस के साथ मिलकर काम कर रही हैं। वे पैटर्न का विश्लेषण कर रही हैं। पिछले ऐसे मामलों से तुलना कर रही हैं। इससे अपराधियों के नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिलती है।

सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा एक बड़ा सवाल है। स्कूल, अस्पताल और बाजार जैसे स्थान संवेदनशील हैं। इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। नागरिकों का अधिकार है कि वे डरमुक्त वातावरण में रहें।

आगे की राह

अंबाला पुलिस जांच को अंतिम रूप दे रही है। वे स्कूल प्रबंधन से लगातार संपर्क में हैं। स्थिति सामान्य बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। अधिकारी कहते हैं कि वे किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं करेंगे।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर स्कूल सुरक्षा को केंद्र में ला दिया है। शिक्षा विभाग को इस ओर ध्यान देना होगा। संसाधनों का आवंटन बढ़ाना होगा। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मजबूत करना होगा।

सामुदायिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। आम नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए। उन्हें किसी भी असामान्य गतिविधि की रिपोर्ट करनी चाहिए। यह सामूहिक जिम्मेदारी है। तभी ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

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