Himachal News: सिरमौर जिले के नाड़ी गांव का रहने वाला रिखी राम 45 साल बाद अपने घर लौट आया है। सोलह साल की उम्र में एक सड़क हादसे ने उसकी याददाश्त छीन ली थी। चार दशक से ज्यादा समय तक वह दूसरे नाम से जीवन जीता रहा। एक और हादसे के बाद उसकी याददाश्त लौट आई। पंद्रह नवंबर को वह अपने परिवार से मिल पाया।
रिखी राम साल 1980 में काम की तलाश में यमुनानगर गया था। वहां एक होटल में नौकरी मिल गई। एक दिन अंबाला जाते समय उसकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। सिर पर गहरी चोट लगने से उसकी याददाश्त चली गई। वह अपना नाम और पता भूल गया।
कैसे बदली जिंदगी
हादसेके बाद रिखी राम का साथी उसे मुंबई ले आया। उसने उसका नया नाम रवि चौधरी रख दिया। इस नाम से उसने नई जिंदगी शुरू की। वह दादर इलाके में काम करने लगा। बाद में उसे नांदेड़ के एक कॉलेज में नौकरी मिल गई।
साल 1994 में रिखी राम की शादी संतोषी से हुई। इस दंपति के तीन बच्चे हुए। दो बेटियां और एक बेटा उनके परिवार का हिस्सा बने। रिखी राम को अपने पुराने जीवन की कोई याद नहीं थी। वह पूरी तरह से नए इंसान बन चुके थे।
दूसरा हादसा बना मोड़
कुछ महीनेपहले रिखी राम के साथ दूसरा एक्सीडेंट हुआ। काम पर जाते समय उन्हें फिर चोट आई। इस हादसे के बाद एक अद्भुत बदलाव हुआ। उनकी खोई हुई यादें लौटने लगीं। वह सपनों में अपने गांव को देखने लगे।
उन्हें बार-बार आम के पेड़ और गांव के झूले दिखाई देते। शुरू में उन्होंने इन सपनों को नजरअंदाज किया। जब यह सिलसिला बढ़ता गया तो उन्होंने अपनी पत्नी को इसके बारे में बताया। दोनों ने मिलकर उनके अतीत की खोज शुरू की।
ऐसे मिला परिवार से संपर्क
रिखीराम ने अपने कॉलेज के एक छात्र की मदद ली। उसने गूगल पर नाड़ी गांव और सतौन क्षेत्र के बारे में जानकारी ढूंढी। इस दौरान उन्हें सतौन के एक कैफे का नंबर मिला। कैफे से उन्हें गांव के रुद्र प्रकाश का संपर्क नंबर मिला।
रुद्र प्रकाश ने शुरू में इस बात पर यकीन नहीं किया। उन्हें लगा कि कोई धोखाधड़ी हो रही है। रिखी राम लगातार फोन करते रहे। आखिरकार रुद्र प्रकाश ने उनकी बात मानी और परिवार से संपर्क कराया।
परिवार में खुशी की लहर
रिखीराम के भाई-बहन उन्हें लंबे समय से खोज रहे थे। उनके माता-पिता का निधन हो चुका था। परिवार के बड़े जीजा एमके चौबे ने बातचीत के बाद पहचान लिया कि यह रिखी राम ही हैं। सभी ने मिलकर उनके घर लौटने की तैयारी की।
पंद्रह नवंबर को रिखी राम अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव पहुंचे। भाई दुर्गा राम, चंद्र मोहन और बहनों ने उनका स्वागत किया। ग्रामीणों ने फूल मालाओं और बैंड बाजे के साथ उनका स्वागत किया। पूरा गांव उनके लौटने पर खुशी मना रहा है।

