उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुटी राज्य सरकार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शुक्रवार को पंचायत चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर अंतरिम रोक लगा दी है। 

कोर्ट ने आरक्षण व आवंटन कार्रवाई पर रोक लगाने के साथ ही 15 मार्च को राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अजय कुमार की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने यह आदेश पारित किया है।

बता दें कि इस समय सभी जिलों में आरक्षण की अंतिम सूची तैयार हो रही है। अभी आरक्षण लिस्ट पर आई आपत्तियों को दूर करने का काम चल रहा है। शेड्यूल के हिसाब से 15 फरवरी तक आरक्षण सूची जारी हो जानी चाहिए। दो और तीन मार्च को सभी जिलों में आरक्षण लिस्ट जारी हुई थी। 

इन लिस्ट पर चार मार्च से आठ मार्च तक क्षेत्र पंचायत कार्यालय में आपत्तियां मांगी गई थीं। 9 मार्च को जिला पंचायत राज अधिकारी के कार्यालय पर आपत्तियों को एकत्र किया गया। 10 से 12 मार्च के बीच आपत्तियों का निस्तारण करना था। इसके बाद अंतिम सूची का प्रकाशन होना था।

आरक्षण के फॉर्मूले को लेकर कुछ दिनों से यूपी सरकार और पार्टी में जद्दोजहद चल रहा था। सूत्रों के अनुसार पार्टी में आरक्षण के फॉर्मूले को लेकर असंतोष बहुत बढ़ गया था। पार्टी के कई सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों ने शीर्ष नेतृत्व से यह शिकायत भी की है कि उनके लोगों ने पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी, लेकिन आरक्षण के फार्मूले की वजह से चुनाव लड़ने से वंचित हो गए। 

खबर है कि पंचायतीराज विभाग में इस मुद्दे पर पिछले कई दिनों से गंभीर मंथन चल रहा है। चूंकि हाईकोर्ट ने समयबद्ध ढंग से 15 मई तक पूरी चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न करवाने के आदेश दिए हैं और पंचायतों के पदों की सीटों के आरक्षण की अनंतिम सूची भी जारी हो चुकी है, जिस पर दावे और आपत्तियां मांगे जाने का समय भी सोमवार आठ मार्च तक तय किया गया था।

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