Himachal News: हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। युवा मंत्री विक्रमादित्य सिंह अपने ही बयानों से सरकार के भीतर अकेले पड़ते जा रहे हैं। यूपी-बिहार के आईएएस और आईपीएस अफसरों पर टिप्पणी करना उन्हें भारी पड़ रहा है। तीन मंत्रियों के किनारा करने के बाद अब कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। धर्माणी ने उन्हें सार्वजनिक मंचों के बजाय मुख्यमंत्री से बात करने की नसीहत दी है। मंत्रियों के बीच छिड़ी इस जुबानी जंग ने कांग्रेस की गुटबाजी को फिर से उजागर कर दिया है।
मीडिया में बयानबाजी करना गलत: धर्माणी
कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी ने गुरुवार को बिलासपुर के बराड़ी में एक कार्यक्रम के दौरान विक्रमादित्य सिंह को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने साफ कहा कि विक्रमादित्य का बयान पूरी तरह गैरजरूरी और नुकसानदेह है। धर्माणी ने समझाया कि ऑल इंडिया सर्विसेज (IAS/IPS) के अधिकारी अपनी मर्जी से किसी राज्य में नहीं जाते हैं। इनकी नियुक्ति भारत सरकार करती है। प्रशासन चलाने में सबकी भूमिका अहम होती है। सार्वजनिक मंच से अफसरों के खिलाफ बोलने से गलत संदेश जाता है।
‘हिमाचली भी बाहर डीजीपी बनते हैं’
राजेश धर्माणी ने विक्रमादित्य को आईना दिखाते हुए कहा कि हिमाचल के लोग भी दूसरे राज्यों में चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी जैसे पदों पर रहे हैं। दूसरे राज्यों में हमेशा बेस्ट टैलेंट भेजा जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हम यहां ऐसी बातें करेंगे, तो बाहरी राज्यों में काम कर रहे हिमाचली लोगों पर इसका बुरा असर पड़ेगा। कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के तालमेल से ही सरकार चलती है। ऐसे बयान खुद मंत्री के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
मंत्री की नसीहत- सीएम से करो बात
धर्माणी ने विक्रमादित्य सिंह को सलाह दी कि अगर उन्हें किसी अधिकारी से दिक्कत है, तो मीडिया में जाने की जरूरत नहीं थी। उन्हें यह मुद्दा कैबिनेट मीटिंग में उठाना चाहिए था या सीधे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करनी चाहिए थी। विकास के लिए हिमाचल कई मामलों में दूसरे राज्यों पर निर्भर है। ऐसी बयानबाजी से आपसी संबंध खराब होते हैं।
पूरी कैबिनेट हुई विक्रमादित्य के खिलाफ?
विक्रमादित्य सिंह इस मुद्दे पर कैबिनेट में अकेले पड़ गए हैं। इससे पहले डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया था। मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी बयान को गलत बताया था। वहीं, मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने तो तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि ‘वे अफसरों से काम नहीं ले पा रहे हैं, इसलिए ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान दे रहे हैं।’ हालांकि, विक्रमादित्य ने भी पलटवार किया था कि वह अपनी बात पर अडिग हैं और हिमाचल के हितों से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 12 जनवरी को शुरू हुआ था। पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि यूपी और बिहार के आईएएस-आईपीएस अफसर हिमाचल के हितों से खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने धमकी दी थी कि जरूरत पड़ी तो वह ऐसे अफसरों के नाम भी सार्वजनिक करेंगे। इसके बाद आईएएस और आईपीएस एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
