New Delhi News: त्यौहारों के सीजन में हवाई किराए में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। शीर्ष अदालत ने सोमवार को इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह किराए में होने वाले इस अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के मामले में दखल देगा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे यात्रियों का सीधा “शोषण” करार दिया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जवाब तलब किया है।
याचिका में की गई सख्त नियम बनाने की मांग
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट के सामने एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि भारत में निजी एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले किराए को नियंत्रित किया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि एयरलाइंस मनमाने ढंग से दाम बढ़ा देती हैं। इसलिए सरकार को बाध्यकारी नियामक दिशानिर्देश (Binding Guidelines) बनाने चाहिए। कोर्ट ने एयरलाइंस की इस मनमानी को गंभीरता से लिया है।
कुंभ और जोधपुर के किराए देख भड़का कोर्ट
सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने कहा, “हम निश्चित रूप से इस मामले में दखल देंगे।” जजों ने कुंभ मेले और अन्य त्यौहारों के दौरान बढ़े हुए किराए का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली से प्रयागराज और जोधपुर के किराए आसमान छू रहे हैं। यह यात्रियों का खुला शोषण है। जस्टिस मेहता ने हल्के अंदाज में सॉलिसिटर जनरल से कहा कि शायद अहमदाबाद का किराया न बढ़ा हो, लेकिन जोधपुर जाने वाले लोग बहुत परेशान हैं।
23 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। कोर्ट ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से हवाई यात्रियों को आने वाले समय में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। लोग लंबे समय से डायनामिक प्राइसिंग के नाम पर हो रही लूट की शिकायत कर रहे थे।
