रणनीतिक विनिवेश की प्रक्रिया में चल रही सरकारी कंपनी एयर इंडिया की पायलट यूनियनों ने अपने वेतन की कटौती में पांच प्रतिशत कम करने के प्रबंधन के निर्णय को खारिज कर दिया है। यूनियनों ने धमकी दी है वेतन कटौती में अच्छी खासी कमी न की गई तो वे हड़ताल का रास्ता पकड़ सकती हैं।

उन्होंने एयर इंडिया के सीएमडी से पूछा कि क्या इस फंड को संसद के नए भवन या पीएम केयर्स के लिए दान में दिया जाएगा? इंडियन पायलट्स गिल्ड एंड इंडियन के दो पायलट एसोसिएशन ने कहा, “हम इस तुच्छ अवैध वेतन कटौती में पांच प्रतिशत वापस नहीं ले सकते हैं और आप इस राशी को संसद या पीएम कार्स के निर्माण के लिए 5 प्रतिशत धनराशि दान करने की सलाह दे सकते हैं।” सीएमडी राजीव बंसल को एक पत्र में वाणिज्यिक पायलट एसोसिएशन।

गुरुवार को एयर इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक राजीव बंसल को लिखे एक संयुक्त पत्र में, दो युनियनों- इंडियन पायलट्स गिल्ड (आईपीजी) और इंडियन कमर्शियल पायलट एसोसिएशन (आईसीपीए) ने कहा, ‘मौजूदा वेतन कटौती के स्तर को पांच प्रतिशत कम करना निहायत अपमानजनक है। आप संबंधित पायलटों के इस धनराशि को संसद के नए भवन के निर्माण या पीएम केयर्स के लिए दान करने की सलाह दे सकते हैं।’ 

उन्होंने कहा कि इस कदम के बावजूद पायलटों के लिए वर्तमान सकल वेतन की कटौती मात्र तीन प्रतिशत घटी है। पिछले महीने नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिखे एक पत्र में, यूनियनों ने कहा था कि अन्य एयरलाइनों ने वेतन भत्तों को फिर से बहाल कर दिया है, लेकिन एयर इंडिया समूह के पायलटों को कम वेतन मिलना जारी है, जो सामान्य वेतन से 70 प्रतिशत तक कम है।

पायलटों ने कहा कि अगर एयर इंडिया प्रबंधन उनकी बात नहीं मानती है तो वे औद्योगिक कार्रवाई का सहारा लेने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि उन्होंने एयर इंडिया के पायलटों और सहायक कंपनियों के लिए कटे हुए वेतन के मुद्दे के निवारण के लिए प्रबंधन को संदेह के हर लाभ के साथ-साथ पर्याप्त समय दिया है। उन्होंने कहा, ‘अगर हमें इस अनुपातहीन वेतन कटौती में समय पर पर्याप्त कमी नहीं दिखती है, तो हमें ‘औद्योगिक कार्रवाई’ सहित कठोर साधनों के माध्यम से न्याय पाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।’

By

error: Content is protected !!