संविधान हमें विरोध करने का हक देता है और विरोध के लिए प्रदर्शन और धरना करने की इजाजत भी देता है लेकिन इसके लिए शर्तें हैं। संविधान कहता है कि सरकारें विरोध प्रदर्शन के हक को नहीं रोक सकतीं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट पिछले सालों में कई बार संविधानसम्मत तरीके से इस पर रुख जाहिर करता रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले कुछ सालों में लगातार लोकतंत्र में विरोध के अधिकार को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुका है। पिछले साल भी दिसंबर के समय जब जंतर-मंतर के बाहर धरना – विरोध प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, तब भी सुप्रीम कोर्ट ने उसे उठा लिया था। तब कोर्ट ने कहा था कि नागरिकों के सभा करने और विरोध करने के अधिकार पर पूरी तरह बंदिश नहीं लगाई जा सकती है।

विरोध करने का अधिकार संविधान के तहत हमारे मूलभूत अधिकारों में शामिल होता है लेकिन इसके साथ शर्त ये भी है कि शांतिपूर्ण हो और इससे आमलोगों और सरकारी मशीनरी के कामकाज में बाधा नहीं आए।

संविधान शांतिपूर्ण इकट्ठा होने का अधिकार देता है:
“भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (बी) के अनुसार शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के जमा होने का अधिकार है. इसके अलावा, शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हमारे संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को दिया गया है।

पिछले एक साल में कम से कम एक दो बार ऐसे मौके जरूर आए हैं जब दिल्ली पुलिस को इसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट की लताड़ मिली। सुप्रीम कोर्ट का लगातार कहता रहा है, ‘शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करना, किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है। ये किसी भी तरह से उनसे छीना नहीं जा सकता। कार्यपालिका या न्यायपालिका, किसी भी कार्रवाई के जरिए इस अधिकार को वापस नहीं ले सकती।’

क्या अनुमति लेना जरूरी है:
ये गौर करने बात है कि धरना प्रदर्शन में किसी भी तरह की हिंसा न हो और प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी है। मौलिक अधिकारों का हवाला देकर अपने अधिकार का इस्तेमाल करने के साथ ये भी जरूरी है कि सभी तरह के कानून का पालन किया जाए। संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) में अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार दिया गया है। वहीं अनुच्छेद 19 (1) (B) नागरिकों को अधिकार है कि वो अपनी मांग और किसी बात के विरोध के लिए शांतिपूर्ण तरीके से एक जगह इकट्ठा हों।

धरना-प्रदर्शन करने के लिए नियम कायदे:
किसी भी तरह के धरना प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी है. कानून और व्यवस्था राज्य का मसला है. इसलिए इसको लेकर अलग अलग राज्यों में अलग अलग व्यवस्था है. लेकिन इसके लिए कुछ नियम कॉमन हैं जो तकरीबन हर जगह अपनाई जाती है मसलन-
-धरना प्रदर्शन से पहले पुलिस की अनुमति जरूरी है. इसके लिए पुलिस की परमिट और उनसे नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना जरूरी है।
-अगर पुलिस को लगता है कि इससे इलाके की शांति को खतरा है और इससे तनाव या हिंसा के हालात पैदा हो सकते हैं तो पुलिस परमिट देने से मना कर सकती है।
-धरना प्रदर्शन के बारे में हर तरह की जानकारी पुलिस को देना जरूरी है।
-पुलिस को ये भी बताना पड़ेगा कि धरना प्रदर्शन क्यों दिया जा रहा है। इसकी तारीख, तय समय सीमा और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या के साथ ये भी बताना होगा कि ये किन-किन इलाकों से होकर गुजरेगा।
-अनुमति हासिल करने वाले का नाम, पता और फोन नंबर देना जरूरी है।
-अनुमति हासिल करने वाले के दस्तावेज मसलन- पहचान पत्र, आवास प्रमाण पत्र, फोटोग्राफ और एफिडेविट देना जरूरी है।

धरना प्रदर्शन पर पाबंदियां:
संविधान का 19(1)(B) अगर सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से धरना प्रदर्शन का अधिकार देता है तो अनुच्छेद 19(1)(3) उस पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाता है। धरना प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती:
-अगर राज्य की सुरक्षा को इससे किसी भी तरह का खतरा हो।
-अगर पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर इसकी वजह से असर पड़ने की आशंका हो।
-अगर आम जनजीवन के डिस्टर्ब होने का खतरा हो।
-अगर इससे अदालत की अवमानना का मामला बनता हो।
-अगर इससे देश की एकता और अखंडता को खतरा उत्पन्न होता हो।

By RIGHT NEWS INDIA

RIGHT NEWS INDIA We are the fastest growing News Network in all over Himachal Pradesh and some other states. You can mail us your News, Articles and Write-up at: News@RightNewsIndia.com

error: Content is protected !!