Maharashtra News: मुंबई की एक अदालत ने 50 साल पुराना एक अनोखा मामला निपटाया है। यह मामला महज 7.65 रुपये की चोरी का था। यह केस साल 1977 में दर्ज हुआ था। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती कुलकर्णी ने अब इस मामले को बंद कर दिया है। अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक छोटे मामले लटकाना उचित नहीं है।
1977 में क्या हुआ था?
यह घटना 1977 में मुंबई के माझगांव इलाके की है। दो अज्ञात व्यक्तियों पर 7.65 रुपये चुराने का आरोप लगा। उस जमाने में यह रकम थोड़ी बड़ी मानी जाती थी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया। लेकिन सालों की तलाशी के बाद भी दोनों आरोपी कभी नहीं मिल पाए।
अदालत ने क्या कहा?
मजिस्ट्रेट आरती कुलकर्णी ने 14 जनवरी 2024 को फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि पांच दशक बाद भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई। कोई ठोस सबूत भी सामने नहीं आया। ऐसे में मुकदमे को लंबित रखना न्यायिक प्रक्रिया पर अनावश्यक बोझ है। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया और केस बंद कर दिया।
चोरी की रकम शिकायतकर्ता को लौटाने का आदेश
अदालत ने जब्त किए गए 7.65 रुपये शिकायतकर्ता को वापस करने का आदेश दिया है। अगर शिकायतकर्ता नहीं मिलता है, तो रकम सरकारी खजाने में जमा हो जाएगी। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 379 (चोरी) के तहत दर्ज था।
छोटे मामलों में ‘संक्षिप्त सुनवाई’ का नियम
अदालत ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण बात कही। चोरी की रकम 2,000 रुपये से कम थी। ऐसे मामले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 260 के तहत ‘संक्षिप्त सुनवाई’ में आते हैं। इसका मकसद छोटे अपराधों में तेज न्याय दिलाना है। इसलिए ऐसे मामलों को दशकों तक लटकाए रखना गलत है।
