Afghanistan News: तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार अफगानिस्तान ने भारत में एक राजनयिक नियुक्त किया है। नूर अहमद को नई दिल्ली स्थित अफगान दूतावास में तैनात किया गया है। यह नियुक्ति दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देती है। नूर अहमद पहले अफगान विदेश मंत्रालय में राजनीतिक निदेशक रह चुके हैं।
द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच यह कदम उठाया गया है। अफगानिस्तान का एक उच्चस्तरीय मंत्री दल हाल ही में भारत आया था। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली ने भारत को दवा आपूर्ति का प्रमुख साझेदार बताया था। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अध्याय की बात कही।
इसकी पृष्ठभूमि में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच खराब संबंध भी एक कारक हैं। जलाली ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ संबंध बिगड़े हुए हैं। ऐसे में अफगानिस्तान के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में उभर रहा है। भारत ने भी मानवीय सहायता जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
नूर अहमद की नियुक्ति एक व्यवस्थित प्रक्रिया का हिस्सा लगती है। पिछले वर्ष अक्टूबर में अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुतक्की ने भारत की आधिकारिक यात्रा की थी। उन्होंने इस यात्रा को सफल और लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत से भरपूर बताया था। यह तालिबान शासन के बाद किसी अफगान विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा थी।
वीजा समस्या का समाधान हुआ
नवंबर 2024 मेंएक और महत्वपूर्ण घोषणा हुई थी। अफगानिस्तान के वाणिज्य मंत्री ने कहा था कि वीजा संबंधी लंबे समय की समस्या सुलझ गई है। इससे अफगान नागरिक अब चिकित्सा उपचार और व्यापार के लिए भारतीय वीजा पा सकते हैं। यह कदम आर्थिक और सामाजिक संपर्क बढ़ाने के लिए अहम है।
मानवीय सहायता द्विपक्षीय संवाद का प्रमुख स्तंभ बनी हुई है। भारत लगातार अफगानिस्तान को दवा और अन्य स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध करा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के शिखर सम्मेलन में भी इस सहयोग पर चर्चा हुई। अफगान प्रतिनिधिमंडल ने भारत के समर्थन की सराहना की।
नए राजनयिक का अनुभव
नए नियुक्त राजनयिक नूर अहमद केपास विदेश मंत्रालय में कार्य का व्यापक अनुभव है। राजनीतिक निदेशक के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। यह अनुभव भारत में उनके कार्यकाल के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। वह दोनों देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की कुंजी हो सकते हैं।
भारत ने हमेशा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता का समर्थन किया है। तालिबान शासन के दौरान भी मानवीय सहायता पर ध्यान केंद्रित रहा। नए राजनयिक की नियुक्ति से आधिकारिक चैनलों से बातचीत को गति मिलने की उम्मीद है। यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
भविष्य की संभावनाएं
दोनोंदेशों के बीच संबंधों को लेकर सतर्क आशावाद बना हुआ है। राजनयिक नियुक्ति और मंत्रिस्तरीय यात्राएं सकारात्मक संकेत हैं। व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की गुंजाइश है। दोनों पक्ष वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक-दूसरे के लिए रणनीतिक रूप से प्रासंगिक हैं।
अफगानिस्तान की आंतरिक स्थिति अभी भी चुनौतियों से भरी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग उसके पुनर्निर्माण के लिए जरूरी है। भारत ने अपनी ऐतिहासिक भूमिका को जारी रखने का संकेत दिया है। नूर अहमद की नियुक्ति इस दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

