लड़की की मृत्यु के बाद भी नही जागा प्रशासन, चिन्हित किया गया खतरनाक पेड़ नही काटा

करसोग। करसोग में होने वाले आगामी जन मंच से पहले ही लोगों ने अपने मुद्दे उठाने शुरू कर दिए हैं। ममेल पंचायत के कानि मंडलाह की जनता ने विरोध जताते हुए जान माल के लिए खतरा बने सफेदा के पेड़ों को गिराने व स्कूल में कटे पेड़ों के मलबा उठाने की मांग की है।
गौरतलब है कि 26 जून 2019 को सरकारी स्कूल की दीवार के पास सफेदा का पेड़ गिरने से एक लड़की की मौत हो गई थी इसके अलावा घरों व बिजली के खंभों का भी नुकसान हुआ था। कई लोग बाल बाल बचे थे।

उस समय चिन्हित कर 27 पेड़ गिराए गए थे, उनका मलबा अभी तक उठाया नही गया है। एक पेड़ अभी भी जान माल के लिए खतरा बना हुआ है। मर्त लड़की की मां ने रोते बिलखते कहा है कि जैसा मेरी बची के साथ हुआ वह किसी के साथ ना हो, पैसे से बच्चे नही मिलते। जहां भी खतरनाक पेड़ हैं उनको गिरना चाहिए।

सेवा निविर्त कैप्टन चेतराम ने कहा कि उन्होंने सरकार व प्रशासन को कई बार पत्र लिखे लेकिन अभी तक कोई करवाई नही हुई है। जंहा पर मलबा गिरा है वह जगह स्कूल की कैंटीन के लिए आवंटित की गईं है। हम कार्पोरेशन से मांग करते हैं की जन मंच से पहले मुद्दा हल होना चहिये।

समाज सेवी बंसी लाल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार समय रहते पेड़ों को नही काटती तो इस पर जनांदोलन होगा। इसकी जिम्मेवारी सरकार व स्थानीय प्रशासन की होगी। करसोग नगर पंचायत में भी इस तरह के 56 पेड चिन्हित किये गए हैं, लगता है प्रशासन उनको काटने के लिए किसी हादसे का इंतजार कर रहा है।

इस दौरान कृष्ण लाल, रमेश कुमार, यशपाल, मंगत राम, ज्ञान चन्द, कहल चन्द, कर्मदास, जीतराम, बोधि सिंह, चुनीलाल, पुरान चंद, ललित कुमार ने भी विरोध प्रकट किया।

सहायक प्रबंधक कार्पोरेशन विभाग मीना राम शर्मा ने दूरभाष के माध्यम से बताया कि चिन्हित किया गया पेड़ विभाग की नजर में है, जल्द करवाई की जाएगी। स्कूल का मलबा उठाने की जिम्मेवारी ठेकेदार की है।

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