अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड गांव मंदली(रोहड़ू), सैंज(छैला) और बिथल(कुमारसैन) CA स्टोर ने वर्ष 2020 में ज़िला शिमला और किन्नौर, हिमाचल में सेब उत्पादकों से अधिकतम 85 रु0 प्रति किलो सेब खरीदे, स्टोर किया और पैक किया है।

12 फरवरी 2021 को 6 सेब(900 ग्राम) की पैकिंग को 196 में बेच रहा है। मतलब 111(196-85) रु0 प्रति किलो मुनाफा। यदि एक कार्टन 25 किलो का है तो 2,775 रु0 प्रति कार्टन मुनाफा। कार्ल मार्क्स ने 1864 में दास कैपिटल (Das Capital) में मुनाफे को सरप्लस वैल्यू कहा है जो उत्पादन करता और श्रीमकों तक नहीं पहुचता।

अडानी ने किसानों से सेब सिर्फ खरीदा, स्टोर किया है और पैक किया है। कीमत 33 रु एक सेब की।

ऐसा ही अनाज़ के साथ भी करने की कोशिश की जा रही है।जो लोग बता रहे की कृषि कानून किसानों के हक में हैं। किसानों को तो पता लग गया है कि ये कानून किसानों के हक में नही है इसलिए सड़को पर है।

ये कानून उस बची हुई आवादी के लिए भी ख़तरनाक है जो किसानी तो नही करती पर कृषि उत्पाद से हर दिन डील करती है।

अडानी एक सेब 33रु का अंतिम उपभोक्ता तक पहुँच रहा। पर किसानों को तो इसमें कोई फायदा नही मिला ।

अब सवाल उस अंतिम उपभोक्ता से है? ये कृषि क़ानून सेब की तरह आपको गेँहू, चावल, आटा, दाल ये सब पहुचायेंगे।

आपको फिर भी ये कानून किसान और देश हित में लग रहे तो आपको अच्छे खाने के साथ एक अच्छे डॉक्टर की भी जरूरत है।

By RIGHT NEWS INDIA

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