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तलाक के बाद पत्नी का संपत्ति पर हक? हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, जानकर चौंक जाएंगे आप

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि तलाक होने के बाद भी महिलाएं अपनी संपत्ति वापस मांग सकती हैं। अगर पति-पत्नी के बीच तलाक की डिक्री आ चुकी है, तब भी महिला फैमिली कोर्ट में अर्जी दे सकती है। वह अपने धन, उपहार और अन्य संपत्तियों की वापसी का दावा कर सकती है। कोर्ट का यह फैसला उन महिलाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं।

फैमिली कोर्ट को मिला विशेष अधिकार

न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फैमिली कोर्ट के पास संपत्ति विवाद सुलझाने का विशेष अधिकार है। यह अधिकार सिविल कोर्ट से भी ऊपर है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम किसी भी पक्ष को दोबारा लंबी कानूनी लड़ाई के लिए मजबूर नहीं कर सकते। न्याय यही कहता है कि फैमिली कोर्ट ही इन विवादों का निपटारा करे। कोर्ट ने पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले को वापस भेज दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों को 17 फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया है। यह मामला 2018 के एक तलाक केस से जुड़ा है। महिला ने ‘स्त्रीधन’ की वापसी के लिए आवेदन किया था, जिसे निचली अदालत ने पहले खारिज कर दिया था।

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खाकी पर दाग: ड्रग तस्करी में फंसा पुलिस वाला

शिमला की विशेष अदालत ने नशा तस्करों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल राहुल वर्मा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। राहुल पर अंतरराज्यीय हेरोइन तस्करी गिरोह के सरगना संदीप शाह के साथ शामिल होने का आरोप है। विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने आरोपों को बेहद गंभीर बताया है। राहुल पिछले छह साल से नारकोटिक्स यूनिट में तैनात था। उस पर अपने पद के दुरुपयोग का आरोप लगा है। जांच में सामने आया कि वह शिमला में हेरोइन की ढुलाई और वितरण का काम देखता था। पुलिस को उसकी ससुराल से एक सिमकार्ड मिला है जो तस्कर संदीप शाह ने दिया था। गिरफ्तारी के डर से उसने अपना मोबाइल भी फॉर्मेट कर दिया था।

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टेंडर खत्म होने पर जब्त नहीं होगी राशि

हाईकोर्ट ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी स्थिति साफ की है। कोर्ट ने कहा कि अगर टेंडर की वैधता अवधि खत्म हो चुकी है, तो विभाग सुरक्षा राशि (EMD) जब्त नहीं कर सकता। साथ ही ठेकेदार को भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के एक आदेश को रद्द कर दिया। विभाग ने एक दवा आपूर्तिकर्ता फर्म की 2 लाख रुपये की राशि जब्त कर ली थी। कोर्ट ने इसे असांविधानिक बताया है। सरकार को तीन महीने के भीतर पैसे लौटाने का आदेश दिया गया है। फर्म पर लगा तीन साल का प्रतिबंध भी हटा दिया गया है।

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