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अंतरिक्ष में ‘चमत्कार’! इसरो का रॉकेट हुआ तबाह, लेकिन मलबे से ‘जिंदा’ बच निकला ये छोटा कैप्सूल

Sriharikota News: इसरो (ISRO) के मिशन में एक बेहद अजीब और हैरान करने वाली घटना हुई है। सोमवार को पीएसएलवी-सी62 रॉकेट अपनी उड़ान के दौरान फेल हो गया। रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया और मिशन असफल घोषित कर दिया गया। इस हादसे में कई महत्वपूर्ण उपग्रह नष्ट हो गए। लेकिन, इस तबाही के बीच एक ‘चमत्कार’ हुआ है। मलबे और आग के बीच से स्पेन का एक छोटा कैप्सूल सुरक्षित बच निकला। उसने पृथ्वी पर डाटा भी भेजा है। इसरो के वैज्ञानिकों के लिए भी यह खबर किसी आश्चर्य से कम नहीं है।

आग और मलबे के बीच कैसे बचा ‘KID’?

स्पेनिश स्टार्टअप ‘ऑर्बिटल पैराडाइम’ ने इस बारे में बड़ा खुलासा किया है। उनका ‘केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर’ (KID) कैप्सूल इस भयानक विफलता के बाद भी बच गया। यह फुटबॉल के आकार का एक प्रोटोटाइप है। इसका वजन मात्र 25 किलोग्राम है। रॉकेट के चौथे चरण में भारी गड़बड़ी हुई थी। वहां अत्यधिक गर्मी और दबाव था। इसके बावजूद यह कैप्सूल रॉकेट से अलग होने में सफल रहा। इसरो के मिशन में हुई इस घटना ने दुनिया भर के अंतरिक्ष विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है।

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3 मिनट तक भेजता रहा सिग्नल

ऑर्बिटल पैराडाइम ने सोशल मीडिया पर इस सफलता की जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि KID कैप्सूल न केवल अलग हुआ, बल्कि एक्टिव भी हो गया। इसने 3 मिनट से अधिक समय तक डाटा प्रसारित किया। कैप्सूल ने 28g तक का गुरुत्वाकर्षण भार (G-load) सहन किया। यह इंसान की सहनशक्ति से कई गुना ज्यादा है। कंपनी अब इसके प्रक्षेप पथ (Trajectory) का विश्लेषण कर रही है। वे जल्द ही इसकी विस्तृत रिपोर्ट जारी करेंगे। इसरो के असफल मिशन के बीच यह एक तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है।

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साल 2026 की पहली बड़ी उड़ान

यह इसरो का साल 2026 का पहला प्रक्षेपण था। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रॉकेट ने सुबह 10:17 बजे उड़ान भरी थी। इसमें डीआरडीओ का जासूसी उपग्रह ‘ईओएस-एन1’ (अन्वेषा) भी शामिल था। इसके अलावा 15 अन्य विदेशी उपग्रह भी इसमें मौजूद थे। रॉकेट के पहले तीन चरण बिल्कुल सही चले। लेकिन चौथे चरण में आई खराबी ने सब कुछ बदल दिया।

इसरो प्रमुख ने की पुष्टि

इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने मिशन कंट्रोल सेंटर से विफलता की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उड़ान के अंतिम चरण में ‘विसंगति’ देखी गई। रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया था। इसी कारण उपग्रह अपनी कक्षाओं में स्थापित नहीं हो सके। वैज्ञानिक अब डाटा का विश्लेषण कर रहे हैं। इसरो जल्द ही पता लगाएगा कि आखिर चौथे चरण में क्या गलत हुआ था।

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