Mandi News: मंडी की सीनियर सिविल जज की अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पार्टनरशिप शर्तों का उल्लंघन करने पर प्रतिवादी अजय कुमार पर सख्त कार्रवाई की है। अदालत ने अजय को आदेश दिया है कि वह वादी पक्ष को 21 लाख रुपये का भुगतान करे। यह राशि दिवंगत मनी राम के कानूनी वारिसों को दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने वाद दायर करने की तारीख से रिकवरी तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।
शराब ठेके की पार्टनरशिप में हुआ था खेल
यह पूरा विवाद साल 2014-15 का है। दिवंगत मनी राम ने रोहंडा चौक और जुन्गी करसोग में शराब के ठेके चलाने के लिए अजय कुमार के साथ पार्टनरशिप की थी। दोनों के बीच एक लिखित समझौता (डीड) हुआ था। इसके मुताबिक, अजय कुमार को व्यापार का 75 फीसदी हिस्सा मिलना तय था। शर्त यह थी कि व्यापार में होने वाले किसी भी नुकसान की पूरी जिम्मेदारी अजय की होगी। फर्म का हिसाब-किताब और आबकारी विभाग का टैक्स भरने का जिम्मा भी अजय के पास ही था।
फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त होने पर खुला राज
मामले में असली पेंच वित्तीय वर्ष 2015-16 के अंत में फंसा। उस समय खुलासा हुआ कि अजय कुमार ने 22,61,718 रुपये की लाइसेंस फीस जमा ही नहीं करवाई है। टैक्स न भरने पर आबकारी विभाग ने सख्त कदम उठाया। विभाग ने सिक्योरिटी के तौर पर रखी गई मनी राम की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को जब्त कर लिया। पार्टनरशिप डीड के अनुसार इस नुकसान की भरपाई अजय को करनी थी, लेकिन वह इसमें नाकाम रहा।
कोर्ट में पेश नहीं हुआ आरोपी
अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी अजय कुमार न तो पेश हुआ और न ही अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने इसे उसकी तरफ से दोष की मूक स्वीकृति माना। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि वादी ने अजय कुमार के भरोसे पर अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी। प्रतिवादी की धोखाधड़ी से उन्हें भारी नुकसान हुआ। अदालत ने इसे गंभीर मामला मानते हुए अजय को मूल रकम, ब्याज और मुकदमे का पूरा खर्च उठाने का आदेश दिया है।
